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राष्ट्रपति के साथ-साथ प्रोफ़ेसर भी रहे प्रणब मुखर्जी, जानें उनके जीवन की कुछ खास बातें

राष्ट्रपति के साथ-साथ प्रोफ़ेसर भी रहे प्रणब मुखर्जी, जानें उनके जीवन की कुछ खास बातें
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उदय सर्वोदय

नई दिल्ली: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सोमवार कोनिधन हो गया। दिल्ली स्थित सेना के अनुसंधान एवं रेफरल अस्पताल में भर्ती मुखर्जीकी हालत सोमवार को और बिगड़ गई थी। अस्पताल ने बताया था कि मुखर्जी का स्वास्थ्यसोमवार को और खराब हो गया गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि उन्हें फेफड़ेमें संक्रमण की वजह से सेप्टिक शॉक लगा है। 84 वर्षीय प्रणब मुखर्जी लंबे समय से बीमार थे।

प्रणब मुखर्जी देश के 13वें राष्ट्रपति थे। 15 जून, 2012 को वे भारत के राष्ट्रपति बने थे। मुखर्जी बेहदप्रभावी राजनीतिज्ञ रहे। उनको कांग्रेस कासंकटमोचक कहा जाता था। यहां प्रस्तुत है, उनके जीवन कीकुछ खास बातें...

  • 11 दिसंबर, 1935 को जन्मे प्रणब मुखर्जी प्रोफ़ेसर भी रहे थे। उन्होंने 1963 में पश्चिम बंगाल के विद्यानगर कॉलेज में छात्रों को पॉलिटिकल साइंस पढ़ाया था।
  • प्रणब मुखर्जी ने स्थानीय बंगाली समाचार पत्र ‘देशर डाक’ में बतौर पत्रकार भी काम किया था।
  • राजनीति में प्रणब मुखर्जी को इंदिरा गांधी लेकर आयी थीं और उन्होंने ही राज्यसभा का सदस्य बनने में प्रणव दा का मार्गदर्शन किया था।
  • प्रणब मुखर्जी बहुत कामकाजी थे। उनकी आदत में लगातार काम करना शामिल था। उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी के अनुसार प्रणब दा एक दिन में 18 घंटे काम किया करते थे। वह मुश्किल से छुट्टियां लेते थे। कभी नागा न करना उनकी जैसे आदत हो गयी थी। केवल दुर्गा पूजा के दौरान ही छुट्टी लेकर अपने गृह नगर मिराती जाते थे।
  • प्रणब के बारे में कहा जाता है कि वो एकमात्र ऐसे मंत्री थे, जिन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा के बल पर चार बड़े मंत्रालय यानी रक्षा, वाणिज्य, विदेश और वित्त मंत्रालय को संभाला था।
  • प्रणब अपनी तरह के एकलौते वित्तमंत्री हुए थे, जिन्होंने सात बार बजट पेश किया था, इसके लिए उन्हें 1984 में यूरोमनी मैग्जीन द्वारा दुनिया का सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री भी घोषित किया गया था।
  • एक समय ऐसा भी आया था, जब प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी, वो समय था इंदिरा गांधी के निधन के बाद का समय, प्रणब ने तब कांग्रेस छोड़ कर अपनी राजनीतिक पार्टी “राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी” बना ली थी।
  • प्रणब दा एक डायरी रखते हैं जो पिछले 40 सालों से उनके पास है, जिसे उन्हें निधन के बाद ही प्रकाशित किया जाना है।
  • प्रणब देश के उन राष्ट्रपतियों में से एक थे, जिन्होंने कई दया याचिकाएं खारिज की थीं। प्रणब ने 7 दया याचिकाओं को खारिज किया था, जिनमें अफजल गुरु और अजमल कसाब की भी दया याचिका शामिल थी।
  • प्रणब दा का बच्चों, छात्रों और जिज्ञासु युवाओं के प्रति खासा झुकाव था। उन्होंने इसका एक सबूत साल 2015 में दिया था जब शिक्षक दिवस के मौके पर 5 सितंबर को स्कूल के बच्चों को उन्होंने राजनीति शास्त्र पढ़ाकर इतिहास बनाया था।

Updated : 31 Aug 2020 1:30 PM GMT
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