Top
Home > नजरिया > प्रशांत भूषण को सजा सुनाते वक्त उनके लीगल एक्टिविज्म का शानदार रिकॉर्ड देखा जाना चाहिए

प्रशांत भूषण को सजा सुनाते वक्त उनके लीगल एक्टिविज्म का शानदार रिकॉर्ड देखा जाना चाहिए

प्रशांत भूषण को सजा सुनाते वक्त उनके लीगल एक्टिविज्म का शानदार रिकॉर्ड देखा जाना चाहिए
X

कृष्ण कांत

मुझे हैरानी इस बातकी नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को अवमानना दोषी माना, हैरानी इस बात की है कि हमारे समाज ने प्रशांतजैसे लोगों को कभी नहीं पहचाना। एक पीआईएल वॉरियर, एक चर्चित वकील, एक ईमानदार आदमी, कानून में भरोसारखने वाला और कानून के जरिये सुधारों का रास्ता तलाशता एक व्यक्ति आज सुप्रीमकोर्ट में अवमानना का दोषी माना गया। वही कोर्ट जिसके समक्ष बतौर वकील 500 से ज्यादा जनहित याचिकाएं दायर करने कारिकॉर्ड है।

यूपीए सरकार परभ्रष्टाचार का धब्बा लगा तो उसका सबसे बड़ा श्रेय प्रशांत भूषण को था। कॉमनवेल्थघोटाले में भूषण प्रमुख याचिकाकर्ता थे। इसके बाद टूजी घोटाला, कोयला घोटाला आदि में वे याचिकाकर्ता बने।

मोदी सरकार आनेके बाद भी उन्होंने अपना रास्ता नहीं बदला। उन्होंने राफेल मामले को उठाया,उन्होंने घर भागते मजदूरों के मसले को लेकरयाचिका दायर की, उन्होंने पीएमकेयर्स फंड की पारदर्शिता को लेकर याचिका दायर की।

भूषण ने जज लोयाकी मौत का मामला अदालत में उठाया। उन्होंने आरटीआई कानून को कमजोर करने का मसला उठाया, उन्होंने लोकपाल को कमजोर करने का मसला उठाया। यह अलग बातहै कि पिछले कुछ सालों में अदालत ने उनकी ज्यादातर याचिकाओं पर कोई संतोषजनकनिर्णय नहीं दिया है और जनता को भी निराश किया है।

ये प्रशांत भूषणही हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट को सील बंद लिफाफेमें हलफनामा देकर आरोप लगाया था कि मेरा निजी तौर पर अनुभव है कि सुप्रीम कोर्ट के16 पूर्व जजों में आठ भ्रष्टथे।

प्रशांत भूषणमेरी जानकारी में एक ऐसे शख्स हैं, जो इस देश मेंलोकतंत्र और कानून के शासन के सच्चे प्रतिनिधि हैं। मैं जबसे उन्हें जानता हूं,तबसे लगातार वे सरकारों के खिलाफ, जनता का पक्ष लिए अदालतों में खड़े रहे। कई बारउन्हें सफलता मिली, कई बार निराशा मिली।

सभी जज उन्हेंनिजी तौर पर जानते हैं। अगर जजों की राजनीतिक संलिप्तता पर उन्होंने सवाल उठाया तोयह गंभीर मसला है। इस पर सुधार की पहल करने और राजनीति से दूरी बनाने की जगह,कोर्ट उन्हीं को आलोचना करने का दोषी मान रहीहै। कई पूर्व जजों की अपील के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही जारीरखी है।

मुझे निजी तौर परलगता है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट को भूषण के लीगल एक्टिविज्म का शानदार रिकॉर्डदेखना चाहिए और दिल बड़ा करके उन्हें कोई सजा नहीं सुनानी चाहिए। अगर ऐसा हुआ तोयह न्याय प्रणाली पर एक धब्बा होगा।

Updated : 15 Aug 2020 5:22 AM GMT
Tags:    
Next Story
Share it
Top