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पृथ्वी शॉ के डोप टेस्ट फेल मामले ने नया मोड़ लिया

पृथ्वी शॉ के डोप टेस्ट फेल मामले ने नया मोड़ लिया
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नई दिल्ली, उदय सर्वोदय डेस्क। पृथ्वी शॉ की डोप टेस्ट रिपोर्ट पर बीसीसीआई से सवाल पूछे जा रहे हैं कि, आखिर उन्होंने इस पर इतनी लेटलतीफी क्यों की ? डोप टेस्ट की जांच आईपीएल से पहले हुई थी, तो फिर पृथ्वी शॉ को आईपीएल में खेलने की इजाजत कैसे मिली ? बीसीसीआई ने इस मामले पर अपना पल्ला झाड़ लिया और बीसीसीआई का दावा है कि उन्हें पृथ्वी शॉ की डोप टेस्ट रिपोर्ट दो मई को मिली, इसके कारण प्रक्रिया में देरी हुई, लेकिन बोर्ड को रिपोर्ट मई में भी मिल गई थी, तो शॉ को आईपीएल के बाकी बचे मैचों और मुंबई प्रीमियर लीग में कैसे खेलने की अनुमति दी गई और उसे नेशनल क्रिकेट अकादमी की सुविधाएं भी उठाने की छूट कैसे दी गई ?बता दें कि बोर्ड की ओर से सैयद मुश्ताक अली ट्राफी के लिए एनडीटीएल से 10 दिन के अंदर डोप टेस्ट रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था, लेकिन लैब ने एथलीट गोमती की तरह इस रिपोर्ट में भी देरी कर दी। रिपोर्ट दो मई को मिलने के बावजूद ने बोर्ड इस मामले में तुरंत कार्रवाई कर सकता था लेकिन बोर्ड ने इस कार्रवाई की प्रक्रिया आईपीएल बीत जाने के बाद 12 मई को शुरू की। जो प्रतिबंध उसने पृथ्वी शॉ पर 16 जुलाई को लगाया वह पहले भी लगाया जा सकता था ऐसे में पृथ्वी शॉ आईपीएल, एमपीएल नहीं खेल पाते।वाडा नियमों के अनुसार हियरिंग पैनल में एक खिलाड़ी, एक लीग कानून विशेषज्ञ और एक डॉक्टर का होना जरूरी है। किसी भी खिलाड़ी पर फैसला सुनाए जाने के आर्डर में इन तीनों विशेषज्ञों के हस्ताक्षर होते हैं। जब तक तीनों आर्डर पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं तब तक इसे जारी नहीं किया जाता है, लेकिन पृथ्वी शॉ के आर्डर में सिर्फ डॉ. अभिषेक सॉल्वी के हस्ताक्षर हैं। इसका मतलब यह हुआ कि एक सदस्यीय पैनल ने इस मामले की सुनवाई की जो वाडा नियमों के खिलाफ है।

Updated : 2 Aug 2019 8:35 AM GMT
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