Top
Home > शख्सियत > पं. रविशंकर ने 75 साल पहले सितार पर बनाई थी ‘सारे जहां से अच्छा...’ की धुन

पं. रविशंकर ने 75 साल पहले सितार पर बनाई थी ‘सारे जहां से अच्छा...’ की धुन

पं. रविशंकर ने 75 साल पहले सितार पर बनाई थी ‘सारे जहां से अच्छा...’ की धुन
X

उदय सर्वोदय

दिल्ली: भारत रत्न से सम्मानित विश्वप्रसिद्ध सितारवादक पंडित रविशंकर ने देश की आजादी के लिए अलख जगाने के वास्ते 1945 में “सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा” की सितार पर धुन तैयार की थी और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की शहादत पर ‘मोहनकौश’ राग बनाया था।

इस कोरोना काल मेपं. रविशंकर की जन्मशती के मौके पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रख्यात भजन गायकअनूप जलोटा अपने भजनों से उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। पं. रविशंकर म्यूज़िक फाउंडेशन ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस कार्यक्रमका आयोजन किया है।

फाउंडेशन केअध्यक्ष एवं रविशंकर के भांजे नवारुणचटर्जी के मुताबिक, उनके मामा पंडितरविशंकर और उनके भाई उदय शंकर दोनों सच्चे देशभक्त थे और उन्होंने संगीत एवं कलाके माध्यम से आजादी की लड़ाई में अलख जगाने का काम किया था तथा विदेशों में भारतका नाम रोशन किया था। उन्होंने बताया कि पं. रविशंकर की जन्मशती के मौके पर डिजिटलमाध्यम से अब तक करीब 50 से अधिक छोटे-बड़ेडिजिटल कार्यक्रम हो चुके हैं और इस कड़ी में अनूप जलोटा अपने भजन का गायन करेंगे।16 अगस्त को पद्म विभूषण विलायत खां के पुत्र एवं प्रसिद्ध सितार वादक सुजात हुसैनखान पंडित रविशंकर के बारे में अपने संस्मरण सुनाएंगे और कार्यक्रम देंगे।

उन्होंने बतायाकि पहले “सारे जहां से अच्छा”की धुन जो बनी थी, उसमें थोड़ी उदासी का भाव था तो रविशंकर जी से नयी धुनबनाने को कहा गया तो उन्होंने नयी धुन बनाई और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्यासे विचलित होकर उनकी स्मृति में “मोहन कौश”राग भी बनाया था।

उन्होंने कहा किजब गांधी जी की हत्या की खबर मिली तो ऑल इंडिया रेडियो ने पं. रविशंकर से गांधी जीको श्रद्धांजलि देने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया तो पंडितरविशंकर ने रास्ते में ही कार में बैठे-बैठे उसकी धुन तैयार की थी।

चटर्जी ने यह भीकहा कि पं. रविशंकर ने इंदिरा गांधी की हत्या पर “शांति ध्वनि” नाम से संगीत रचना तैयार की थी। आजादी की 50वीं तथा 60वीं सालगिरह पर भी अपना कार्यक्रम पेश कर अपनी राष्ट्रभक्तिका परिचय दिया था। 1997 में मुम्बई मेंआजादी की 50वीं सालगिरह पर 14 अगस्त की आधी रात “राग स्वर्ण” पेश किया था। उनकेसाथ कार्यक्रम में जाकिर हुसैन और अनुष्का शंकर भी थे। उसमे उन्होंने 50 बीट का स्वर्ण ताल भी पेश किया था और उसी साल रॉयल अल्बर्टहॉल में भी आज़ादी का कार्यक्रम पेश किया था। इससे पहले 1964 में मुम्बई विले पार्ले में उस्ताद अकबर अली खान के साथ 15 अगस्त को कार्यक्रम दिया था। इसके बाद 1966 में कलकत्ता में और 1972 में लन्दन में भी स्वाधीनता दिवस पर कार्यक्रम पेश कियाथा।

पंडित रविशंकरम्यूजिक फाउंडेशन ने अब तक पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित बिरजू महाराज, प्रख्यात नृत्यांगना एवं राजसभा सदस्य सोनल मानसिंह ,प्रख्यात बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया, मालिनी अवस्थी, शेखर सेन समेतजाने-माने कलाकारों का डिजिटल कार्यक्रम फेसबुक पर प्रस्तुत किया है।

चटर्जी ने बताया किजब से यह कार्यक्रम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शुरूहुआ है तब से गीत, संगीत, नृत्य और तमाम अन्य वाद्ययंत्रों मे पारंगत राष्ट्रीय औरअंतरराष्ट्रीय पहचान के फनकारों ने पंडित जी के बारे में अपने विचार और यादें साझाकिया है और उनके बारे में अद्भुत जानकारियां दी हैं। जिस तरह से कलाकार पंडित जी के प्रति सम्मान औरसमर्पण व्यक्त कर रहे हैं, उससे पंडित जी के व्यक्तित्व की उँचाई की एक झलक मिलती है।रविशंकर पर पुस्तक लिखने वाले ओलिवर क्रासके तथा वर्ल्ड म्यूजिक इंस्टीट्यूटन्यूयार्क के निदेशक ब्रायन केघर ने अपने हृदय के उद्गार व्यक्त किए हैं।

उन्होंने बतायाकि पंडित रविशंकर के भतीजे आशीष खान के अलावा प्रसिद्ध गायिका वाणी जयराम, पंडित राजन-साजन मिश्र, उस्ताद शहादतहुसैन खान भी कार्यक्रम करेंगे।

पं. रविशंकर काजन्म बनारस में 7 अप्रैल, 1920 को हुआ था जबकि 92 वर्ष की उम्र में 11 दिसंबर, 2012 को अमेरिका के सैनडिएगो के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया था।

Updated : 15 Aug 2020 10:05 AM GMT
Tags:    
Next Story
Share it
Top