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भाजपा को भारी पड़ेगी राजपूतों की नाराजगी

भाजपा को भारी पड़ेगी राजपूतों की नाराजगी
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जयपुर से ¦ मनोज कुमारभाजपा के परंपरागत समर्थक रहे राजपूत व रावणा राजपूत समाज ने आगामी विधानसभा चुनाव में ‘कमल का फूल-हमारी भूल’ के उद्घोष के साथ इस बार ‘कमल’ को ही सबक सिखाने के लिए मजबूती से कमर कस ली है. एक रिपोर्ट...


राजस्थान में नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के दिन अच्छे नहीं दिखाई पड़ रहे हैं. वैसे तो ऐसी स्थिति के पीछे वसुंधरा सरकार द्वारा 5 साल में लिए गए अनेक राजनीतिक-प्रशासनिक निर्णय जिम्मेदार हैं, लेकिन भाजपा की इस दशा के लिए जो सबसे बड़ा कारण स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है- वह है भाजपा के कट्टर व परंपरागत समर्थक रहे राजपूत व रावणा राजपूत समाज की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से भारी नाराजगी. इन दोनों समाजों की राजे से नाराजगी आगामी चुनाव में भाजपा को काफी भारी पड़ेगी. पिछले कुछ वर्षों में वसुंधरा राजे से जाने-अनजाने में अनेक ऐसी गलतियां हुई हैं, जिसकी वजह से राजपूत व रावणा राजपूत समाज इस दफा पहली बार भाजपा को जिताने के बजाय उसे हराने में पूरी शिद्दत के साथ जुट गया है.गौरतलब है कि वसुंधरा राजे व राजपूत समाज के बीच मतभेद की नींव वर्ष 2005-06 में उस समय ही पड़ गई थी, जब राजे ने राजपूतों के राजनीतिक मसीहा पूर्व उप राष्ट्रपति व राजस्थान के 10 साल तक मुख्यमंत्री रहे भैरोसिंह शेखावत को तवज्जो देने में कमी करना शुरू कर दिया. एक समय तो ऐसा भी आया जब वसुंधरा राजे को केंद्र से राजस्थान की राजनीति में लाने वाले शेखावत ने पश्चाताप व्यक्त करते हुए कहा कि, ‘मैंने वसुंधरा को राजस्थान लाकर बड़ी गलती की.’ लोकसभा चुनाव 2014 में राजे ने भाजपा के एक अन्य दिग्गज राजपूत नेता वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह जसोल का टिकट काटकर राजपूतों की नाराजगी को और भी बढ़ा दिया. पिछले 3 वर्षों में हिस्ट्रीशीटर आनंदपाल सिंह व हिस्ट्रीशीटर चतुर सिंह के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की राह में राजे द्वारा ‘वीटो’ करने के मामले में राजपूत व रावणा राजपूत समाज का दबा आक्रोश मुख्यमंत्री के विरुद्ध इस कदर भड़क गया कि सदा ही भाजपा को जिताने में एड़ी-चोटी का जोर लगाने वाले इन दोनों समाजों ने इस बार बाकायदा फलौदी (जोधपुर) में शपथ लेकर व आह्वान कर वसुंधरा राजे व भाजपा को हटाने में अपना पूरा जोर लगा दिया है.गौरतलब है कि राजस्थान में अभी तक भाजपा की सफलता की कहानी मुख्यत: राजपूत/ वैश्य वर्ग व शहरी मतदाताओं के समर्थन के आधार पर पिछले 28 में से लगभग 18 साल तक भाजपा ने राजस्थान में राज किया. अगर विधानसभा क्षेत्रवार बात की जाए तो यह कहा जा सकता है कि राजस्थान में लगभग 4 दर्जन के आसपास ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां हार-जीत का पूरा मामला राजपूत व रावणा राजपूत समाज के समर्थन पर ही निर्भर करता है. इसके अलावा यहां के 200 विधानसभा क्षेत्रों में से शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जहां इन समाजों के 10-15 हजार मतदाता न हों.इन दोनों समाजों की वसुंधरा राजे से मतभेद व ‘प्रतिशोध’ के स्तर तक की नाराजगी बढ़ने में कुख्यात बदमाश आनंदपाल सिंह के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने व गजेंद्र सिंह शेखावत को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बनने से रोकना ही प्रमुख कारण बने. पिछले वर्ष 24-25 जून की रात को चुरू जिले में रावणा राजपूत जाति के 5 लाख रुपये वाले इनामी दुर्दांत अपराधी आनंदपाल सिंह की शोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ कई वर्षों तक जेल काटने वाले तेज तर्रार आईपीएस अधिकारी दिनेश एमएन की अगुवाई वाली राजस्थान पुलिस के स्पेशल आॅपरेशन ग्रुप ने मार गिराया था. राजपूत व रावणा राजपूत समाज ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए सीबीआई जांच की मांग को लेकर आनंदपाल सिंह के गांव सांवराद (नागौर) में शव के साथ बड़ा जमावड़ा किया. इस जमावड़े में हुई हिंसा से 2 लोगों की जान चली गई तथा 2 आईपीएस अधिकारियों पर जानलेवा हमला हुआ. रेलवे सहित कई सरकारी विभागों की संपत्तियों को आंदोलनकारियों ने भारी नुकसान पहुंचाया. शुरुआत में नकारने के बाद राजपूत व रावणा समाज के बढ़ते दबाव व भाजपा हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद वसुंधरा सरकार को अंतत: सीबीआई जांच की सिफारिश करने की मांग को मानने पर बाध्य होना पड़ा. लेकिन जांच शुरू होने पर सीबीआई ने राजपूत समाज के लगभग एक दर्जन बड़े नेताओं पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप राजपूतों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया.नाराज राजपूत समाज को भाजपा हाईकमान, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह व भाजपा के अन्य राजपूत नेताओं के माध्यम से मनाने को प्रयासरत था, तभी मीडिया में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा राजपूत समाज से आने वाले जोधपुर के सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने की खबर आने लगी. गजेंद्र सिंह शेखावत की नियुक्ति पर अनौपचारिक मुहर लगने से पहले ही वसुंधरा राजे ने इस निर्णय के विरुद्ध बगावती रुख अपना लिया. वसुंधरा राजे भाजपा हाईकमान को पहली बार झुकाते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत की संभावित नियुक्ति को रुकवाकर बुजुर्ग मदनलाल सैनी को अध्यक्ष बनाने में सफल रहीं.वसुंधरा राजे गजेंद्र सिंह शेखावत की ताजपोशी को रोकने की अपनी मंशा में तो सफल हो गर्इं, लेकिन इस कदम से पहले से ही असंतुष्ट चल रहे राजपूत समाज का समर्थन उन्होंने खो दिया. जनवरी 2018 में सम्पन्न हुए अजमेर/ अलवर लोकसभा क्षेत्र के उप चुनाव में कांग्रेस को समर्थन देकर भाजपा की हार सुनिश्चित करने में राजपूत व रावणा राजपूत समाज ने अहम भूमिका निभाकर अपनी नाराजगी के राजनीतिक प्रतिफलन से भाजपा को अवगत तो करा दिया था, लेकिन अब विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही इनकी नाराजगी विस्फोटक रूप लेते हुए वसुंधरा राजे की विदाई करने को आतुर हो उठी है. इसी आतुरता के क्रम में 22 सितंबर को पचपदरा (बाड़मेर) में पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह जसोल के पुत्र व भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह ने वसुंधरा राजे द्वारा अपने पिता को ‘अपमानित’ करने के विरोध में ‘स्वाभिमान रैली’ का आयोजन किया. इस सभा में जुटे राजपूत समाज के लाखों लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा छोड़ने का ऐलान करते हुए ‘कमल का फूल-हमारी भूल’ का नारा बुलंद कर दिया. उनकी पत्नी चित्रा सिंह ने रैली को ललकारते हुए कहा कि अगले दो माह में वसुंधरा राजे को चलता कर दिया जाएगा.मानवेंद्र सिंह की ‘स्वाभिमान रैली’ के अगले ही दिन जयपुर में रावणा राजपूत समाज ने एक बड़ी सभा की. इसमें हिस्ट्रीशीटर आनंदपाल सिंह की मां उपस्थित रहीं, इस सभा में जहां ‘कमल का फूल-हमारी भूल’ व ‘आनंदपाल अमर रहे’ का नारा एक बार फिर बुलंद किया गया तो वहीं इसमें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट को आमंत्रित करके कांग्रेस के समर्थन व भाजपा के विरोध की खुलेआम घोषणा कर दी गई.फिलहाल राजपूत समाज के समर्थन से जहां बिन मांगी मुराद होने से कांग्रेस आह्लादित है, तो वहीं भाजपा हाईकमान भी युद्धस्तर पर डैमेज कंट्रोल में जुटा हुआ है. चुनाव में मात्र दो माह बचे हैं और यहां जो परिस्थितियां दिख रही हैं, उससे यह तो तय है कि राजपूत व रावणा राजपूत समाज की नाराजगी भाजपा को भारी पड़ेगी...लेकिन भाजपा को इस होने वाले नुकसान का परिणाम क्या होगा, यह समय ही बताएगा.

Updated : 11 Oct 2018 2:20 PM GMT
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