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रोबोटिक कैटरेक्ट सर्जरी: सिर्फ 30 सेकेंड में मोतियाबिंद का इलाज

रोबोटिक कैटरेक्ट सर्जरी: सिर्फ 30 सेकेंड में मोतियाबिंद का इलाज
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उदय सर्वोदय

बदलती जीवनशैलीके साथ गैजेट्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल और डायबिटीज के मामलों में वृद्धि केसाथ सभी आयु वर्ग के लोगों में आँखों की समस्या बढ़ती जा रही है। इन्हीं गंभीरसमस्याओं में मोतियाबिंद भी शामिल है, जिसमें आंखों की रेटिना पर एक काली परत चढ़ने लगती है। इस काली परत के कारणव्यक्ति को धुंधला दिखाई देने लगता है।

हालांकिटेक्नोलॉजी में प्रगति के साथ इलाज के परिणाम बेहतर हो गए हैं, लेकिन समस्या सिर्फ यह है कि लोग आज भी शुरुआतीजांच और रोकथाम के तरीकों को महत्व नहीं देते हैं।

आंकड़े बताते हैं कि लगभग 60% भारतीय आबादी मोतियाबिंद जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ चुकी है और हर साल 12 लाख से अधिक लोग अपनी दृष्टि खो देते हैं।

मोतियाबिंद कोआमतौर पर ग्लूकोमा और काला मोतिया के नाम से भी जाना जाता है। दुर्भाग्य से इसगंभीर समस्या के कोई लक्षण नहीं नजर आते हैं और न ही दर्द का अनुभव होता है। इसमेंआंखों की पुतली यानी किरेटिना पर एक काली परत चढ़ने लगती है जिसके कारण व्यक्ति धीरे-धीरे अंधा हो जाताहै। इसके बाद मरीज को आंखों की सर्जरीकरानी पड़ती है। विश्व स्तर पर मोतियाबिंद अंधेपन का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।

नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइट के निदेशक, डॉ महिपाल सिंह सचदेव ने बताया कि, “मोतियाबिंद न केवल दृष्टि को प्रभावित करता है बल्कि व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। मोतियाबिंद की प्रारंभिक अवस्था में कोई लक्षण नहीं होने के कारण कभी न ठीक होने वाले अंधेपन का प्रमुख कारण बनता है। यही कारण है कि 90% से अधिक रोगी इसका पता लगाने में चूक जाते हैं और जब तक यह पता चलता है, तब तक समस्या गंभीर हो चुकी होती है।

डॉ महिपाल सिंह सचदेव

एक बारमोतियाबिंद होने के बाद आँखों को पुरानी अवस्था में लाना संभव नहीं है। इसलिएलोगों को समय पर स्क्रीनिंग के महत्व को समझते हुए, समय-समय पर बच्चों की आंखों का चेकअप कराते रहना चाहिए। वहीं बड़ों कोकम से कम 1 साल में चेकअप करानाचाहिए।”

मोतियाबिंद के लक्षणों में धुंधला दिखना, अधिक रौशनी वाली चीजें देखने में समस्या, दोहरा दिखना, रंगों में बदलाव, रात में देखने में समस्या आदि शामिल हैं। इस समस्या से बचाव के लिए जीवनशैली और डाइट में बदलाव जरूरी है। नियमित रूप से योगा व एक्सरसाइज़ करें, पानी का अधिक से अधिक सेवन करें, विटामिन सी और विटामिन ई से भरपूर आहार का सेवन करें, धूम्रपान से दूर रहें और शराब का कम से कम सेवन करें। इस प्रकार मोतियाबिंद की समस्या से बचा जा सकता है।

डॉ महिपाल ने औरअधिक जानकारी देते हुए बताया कि, “इस समस्या की शुरुआती पहचान के साथ, मरीज को प्रारंभिक उपचार के तौर पर मेडिकेशनदिया जाता है। मेडिकेशन से कोई लाभ न मिलने पर कैटरेक्ट सर्जरी की जाती है। इसमेंआंखों की कॉर्निया में 2 एमएम का कट लगायाजाता है, जिससे परत वाले लेंस कोआसानी से निकाला जा सके। प्रभावित लेंस को निकालने के बाद उसकी जगह पर कृत्रिमयानी कि आर्टिफिशियल लेंस लगा दिए जाते हैं।

यह एक पुरानीतकनीक है जबकी रोबोटिक कैटरेक्ट सर्जरी इससे कहीं अधिक प्रभावी और आसान है, जिसमें सर्जरी की सारी प्रक्रिया लेज़र की मदद से की जातीहै। लेज़र पर लगी इमेजिंग तकनीक आंखों के अंदर के भाग को अच्छे से देखने में मददकरती है। कोर्निया में चीरा लगाना, लेंस को निकालनाऔर उसकी जगह पर कृत्रिम लेंस लगाना, ये सभी चीजें रोबोटिक तरीके से की जाती हैं। यह पूरी प्रक्रिया मात्र 30सेकेंड में पूरी हो जाती है।”

Updated : 13 Jun 2020 8:31 AM GMT
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