Top
Home > प्रमुख ख़बरें > रुस में भी जनता के जेहन में शास्त्री जी के मौत पर कई सवाल- डॉ. सत्यपाल सिंह, केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री

रुस में भी जनता के जेहन में शास्त्री जी के मौत पर कई सवाल- डॉ. सत्यपाल सिंह, केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री

रुस में भी जनता के जेहन में शास्त्री जी के मौत पर कई सवाल- डॉ. सत्यपाल सिंह, केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री
X

डॉ सत्यपाल सिंह। केंद्रीय मानव संसाधन विकास व जल संसाधन गंगा पुनरुद्धार राज्य मंत्री। इनका कहना है कि लाल बहादुर शास्त्री की मौत पर रुस में भी चर्चा हो रही है कि आखिर कैसे मौत हुई। इसका खुलासा होना ही चाहिए। सत्यपाल सिंह का कहना है कि आज भी देश में अंग्रेजों के बनाए शिक्षा नीति पर कार्य हो रहा है इसमें बदलाव की आवश्यकता है जिसपर यह सरकार कार्य कर रही है। जल्द ही देश को नई शिक्षा नीति मिलेगी। डॉ सत्यपाल सिंह से संवाददाता मानवेंद्र की खास बातचीत।

-पिछले दिनों आप कजिकिस्तान के दौर से आए हैं। वहां भी लाल बहादुर शास्त्री के मौत पर भी लोगों से चर्चा हुई होगी। लोगों का क्या कहना है।

देखिए हमें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि कजिकिस्तान के लोगों में हैरानी है कि आखिर कैसे मौत हुई लाल बहादुर शास्त्री की। इसका खुलासा होना चाहिए। लाल बहादुर शास्त्री जी प्रधानमंत्री थे और उनकी सुरक्षा को कम तर नहीं किया जा सकता है।

-आप अभी संजय पति तिवारी की पुस्तक ललिता ऑफ्टर शास्त्रीजी का लोकार्पण किया है। इसमें भी यह चर्चा है।

शास्त्री जी के परिवार के लोगों का जिस प्रकार मानना है कि उनकी हत्या हुई है रुस के आसपास के लोगों का भी मानना है।

-ललिता ऑफ्टर शास्त्री जी पुस्तक के बारे में क्या कहेंगे आप।

ललिता शास्त्री हमारे इतिहास के पन्नों की बड़ी धरोहर हैं जिन्हें सहेजकर अगली पीढ़ी के लिए रखा जाना चाहिए। संजय पति तिवारी ने बेहतरीन कार्य किया है।

-आप शिक्षा में सुधार के लिए लगातार लिखते रहे हैं। अब जब आपके पास यह मंत्रालय है क्या कुछ कर रहे हैं।

इस देश की सरकार और शिक्षाविद् भी मानते हैं कि देश में शिक्षा नीति में बदलाव की जरूरत है। आज देश में ऐसी शिक्षा नीति पर कार्य हुआ जो अंग्रेजों ने बनाई थी। अब ऐसी शिक्षा नीति की जरूरत है जो बच्चों को संस्कार दे सकें और बच्चों को रोजगार दे सकें। आज दोनों बातों की कमी नजर आती है। इसलिए देश में नई शिक्षा नीति लाने के लिए एक बहुत बड़ी लोकतांत्रिक कार्रवाई की गई है। जिसे हम एक्सरसाइज बोलते हैं। इसमें 2-2.50 लाख लोगों ने भाग लिया। अपने मत दिए सुझाव दिए। देश में जगह जगह वर्कशॉप हुई। मुझे लगता है कि जो नई कमेटी बनी है डॉ कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में। 31 मार्च तक उन्होंने समय मांगा है उसकी रिपोर्ट आ जाएगी फिर उस कार्य होगा। मुझे लगता है कि इस देश को जल्द ही एक नई शिक्षा नीति मिलेगी।

-आखिर इस बार की शिक्षा नीति बन रही है इसमें क्या आधार बनाया गया है। इस शिक्षा नीति में मुख्य रूप से पांच आधार होंगे। यह शिक्षा किस प्रकार से सहज सुलभ हो। यह शिक्षा किस प्रकार से सामाजिक असमानता दूर हो। किस प्रकार से शिक्षा की गुणवत्ता लाई जाए। चाहे हमें लर्निंग आउटकम लाई जाए। शिक्षा की गुणवत्ता में खासकर चाहे वह आठवीं में पढ़ता है तो वह बच्चा कितना जानता है क्या वह पीछे के क्लास की पढ़ाई ठीक से किया है या नहीं। चाहे स्कूल की शिक्षा हो या उच्चतर शिक्षा हो। शिक्षा किस प्रकार से कम खर्चिली हो। या कह सकते हैं सस्ती हो। ताकि गरीब भी अपने बच्चों को पढ़ा सके। शिक्षा को चलाने वाले चाहे वह कर्मचारी हो, शिक्षक हो या अधिकारी हो सबपर जिम्मेदारी तय किया जाए। आज जो शिक्षा है उसमें कोई जिम्मेदार नहीं माना जाता है। इन सब पर शिक्षा नीति पर विचार किया जाए।

आदिवासी विमर्श अस्तित्व और अस्मिता का

-आज देश में अंग्रेजी का बोलबाला है। क्या मातृभाषा पर सरकार कुछ कर रही है।

मातृभाषा की महत्ता को समझा जाना चाहिए। आज छोटे छोटे गांवों में अंग्रेजी स्कूल खुलते जा रहे हैं। कोई भाषा गलत नहीं हो सकती है लेकिन हमें अपनी मातृभाषा नहीं भूलनी चाहिए। इस पर हमें जोर देने की जरूरत है।

-निजी संस्थानों का आरोप है कि हमारे लिए मानदंड जो सरकार तय करती है वह काफी कड़ी होती है जबकि सरकारी संस्थानों के लिए मानदंड काफी ढीले होती है जिससे हमें काफी असुविधा होती है।

सरकारी स्कूलों में बच्चों का जाना कम हो गया। आज शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया। आज कई जगह डिग्री केवल बांटे जाते हैं। जबकि हमारे यहां कई सरकारी संस्थानों ने विश्व में अपना नाम किया है। आज उनके यहां के छात्र काफी अच्छा कर रहे हैं। जैसे आईआईटी, आईआईएम, इंड़ियन इस्टीट्यूट ऑफ साइंस हैं। केवल यह कह देना की मानक इनके ढीले ठीक नहीं होगा। आज सरकारी संस्था ने देश भर ही नहीं विश्व में अपना नाम किया है।

- आप लगातार लिखते रहे हैं। अब जब खुद आप उस पद पर है तो लागू कर रहे होंगे। आपको काफी कठिनाई भी महसूस हो रहा होगा।

किसी भी सिस्टम में बदलाव लाने के लिए कोई आसान कार्य नहीं होता है। जो काम आसान नहीं होता उसी को करने में मजा आता है। इसीलिए चैलेंजों को स्वीकार करना और राष्ट्र के हित में कार्य करना। यही अपना उद्देश्य होना चाहिए। जिसके लिए हम कार्य कर रहे हैं।

Updated : 22 Nov 2018 4:02 AM GMT
Tags:    
Next Story
Share it
Top