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दिमागी बीमारी मिर्गी के इलाज में वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता

दिमागी बीमारी मिर्गी के इलाज में वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता
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नई दिल्‍ली ब्यूरो | वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नैनो लेजर विकसित किया है, जो हमारे बालों से हजार गुना पतला है। यह नैनो लेजर शरीर के भीतर जाकर जीवित ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना ही आसानी से काम कर सकता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इसके जरिये मिर्गी जैसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर यानी तंत्रिका संबंधी विकारों के उपचार में मदद मिल सकती है। अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा बनाया गया यह लेजर 50 से 150 नैनोमीटर मोटा है। नेचर मैटेरियल नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इस लेजर को जीवित ऊतकों के अंदर भी फिट किया जा सकता है और यह ऊतकों को बिना नुकसान पहुंचाए ही आसानी से काम कर सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इसका उपयोग ऊतकों में रोग की विशेषताओं को समझने के लिए किया जा सकता है। साथ ही गंभीर तंत्रिका संबंधी विकारों का इसके जरिये उपचार किया जा सकता है। इसके अलावा इससे ऊतकों की इमेजिंग भी की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यह लेजर कांच से बना है और बायोकॉम्पेटिबल है। यह एक ऐसी सामग्री होती है, जिससे जीवित ऊतकों को नुकसान नहीं पहुंचता।

शोधकर्ताओं ने कहा कि परंपरागत नैनो लेजर माइक्रोस्कोप के मुकाबले कम प्रभावी हैं और पराबैंगनी किरणों (यूवी लाइट)का उत्सर्जन भी करते हैं, जो शरीर के लिए घातक होती हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के शोधकर्ता और इस अध्ययन के सह लेखक पी. जेम्स स्चुक के मुताबिक, पराबैंगनी किरणों का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव हमारे ऊतकों पर ही पड़ता है। इसके कारण गर्मी बढ़ने से ऑपरेशन का काम भी प्रभावित होता है, इसलिए छोटे और प्रभावी लेजर की जरूरत महसूस हुई। अमेरिका की नॉर्थवेस्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता और इस अध्ययन का सह-नेतृत्व करने वाले टेरी ओडोम ने कहा कि बायोइमेजिंग के लिए लंबी वेवलेंथ की जरूरत होती है क्योंकि वे दृश्य वेवलेंथ फोटॉनों की तुलना में ऊतकों में दूर तक प्रवेश कर सकते हैं और प्रकाश की छोटी वेवलेंथ अक्सर गहरे क्षेत्रों में वांछनीय होती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे नैनो लेजर पारदर्शी हैं, लेकिन नया उपकरण दृश्यमान फोटॉनों को उत्पन्न कर सकता है। इसकी जरूरत तब ज्यादा महसूस होती है जब प्रकाश की मौजूदगी में हमारी आंखें इन्हें देख नहीं पातीं। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह एक साफ-सुथरी प्रणाली है, जो गहरे क्षेत्रों में भी प्रवेश कर तरंग दैध्र्य किरणों को पहुंचाती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, नया लेजर माइक्रोप्रोसेसर जैसे अत्यंत सीमित स्थानों में आसानी से काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि बायोइमेजिंग के क्षेत्र में नया लेजर एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित हो सकता है। नए लेजर की वेवलेंथ (तरंग दैध्र्य) लंबी है और इससे पराबैंगनी किरणों का उत्सर्जन भी कम होता है।

Updated : 25 Sep 2019 5:36 AM GMT
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