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शीरा नीति बन सकती है शराब कारोबारियों तथा चीनी मिल के मालिकों के बीच बढ़ती दूरियों का कारण

शीरा नीति बन सकती है शराब कारोबारियों तथा चीनी मिल के मालिकों के बीच बढ़ती दूरियों का कारण
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लखनऊ ॥ संजय सक्सेना

यूपी में योगी सरकार के ऊपर तरह तरह के सवाल उठने लगे हैं। इन सवालों का मुख्या कारण यह है योगी सरकार द्वारा शराब के कारोबारियों को राहत देना तथा ठीक इसके विपरीत चीनी मिल के मालिकों और किसानों की शिकायत ना सुनना। आपको बता दें कि योगी सरकार से सवाह पूछे जा रहे हैं कि कहीं योगी शराब कारोबारियों के दबाव में तो नहीं आ रहे ! अगर यही हाल रहे तो शराब कारोबारियों तथा चीनी मिल के मालिकों के बीच दूरी बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। सरकार की इस लापरवाही के कारण चीनी मिल के मालिकों तथा किसानों की समस्याएं बढती जा रही हैंए और यदि समय से इसका समाधान नहीं निकला तो ये समस्याएं विकराल रूप लेने में थोडा भी समय नहीं लगाएंगी। molasses policy in uttar pradesh के लिए इमेज परिणामदरअसल, आबकारी विभाग द्वारा नई शीरा नीति में नए शीरा सत्र 2019-20 के लिए आरक्षण में दो प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे चीनी मिल मालिक और किसान संगठन अपने ऊपर कुठाराघात बता रहे हैंै। पयार्वरण संरक्षण के नाम पर काफी दिक्कते झेल रहे गन्ना किसान और चीनी मिलों की वित्तीय हालत वैसे ही काफी खराब चल रही थी। अब योगी सरकार की नई शीरा नीति से यह परेशानी और भी बढ़ गई है। जरूरत तो यह थी कि सरकार चीनी मिलों में शीरे से बायो ईंधन एथनॉल के उत्पादन को बढ़ावा दे। इससे प्रदूषण पर लगाम तो लगती ही इसके साथ-साथ चीनी मिलों को अधिक मुनाफा होता, जिससे चीनी मिल मालिक गन्ना किसानों का भुगतान समय से कर सकते थे। मगर, राजस्व बढ़ाने के चक्कर में योगी सरकार शराब कंपनियों पर सरकार शीरा आरक्षण सीमा को और भी बढ़ाकर मेहरबानी पर मेहरबानी करती जा रही है। molasses policy in uttar pradesh के लिए इमेज परिणामज्ञात्वय हो, शीरा सत्र 2017-18 में चीनी मिलों के लिए 12.50 फीसद शीरा आरक्षित था, जिसे बढ़ाकर 2018-19 में 16 फीसद कर दिया गया। अब 2019-2020 में इसे कम से कम दो प्रतिशत और बढ़ाया जाना प्रस्तावित है,जबकि चीनी मिल मालिक 2017-2018 में हुई 3.5 की वृद्धि को ही अधिक मानते थे। चीनी मिल मालिकों ने इसके खिलाफ आवाज भी बुलंद कर रखी है। चीनी संघ से जुड़े अधिकारियों का कहना है अगर सरकार किसानों और चीनी मिलों को जिंदा रखना चाहती है तो शराब के लिए शीरे का आरक्षण कम किया जाना चाहिए। योगी सरकार द्वारा शीरा आरक्षण बढ़ाए जाने की वजहों को तलाशा जाए तो पता चलता है कि शराब कंपनियां जो शीरा आरक्षित कराती है, उसका मूल्य चीनी मिलों को काफी कम मिलता है, जबकि उस शीरे से यदि चीनी मिल मालिक एथनॉल बनाते हैं तो उनका मुनाफा बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ चीनी मिल, बल्कि गन्ना किसानों को भी लाभ मिलता है। चीनी मिल मालिक पूंजी अधिक उपलब्ध होने के चलते किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान करने में सक्षम हो जाते हैं।सूत्र बताते हैं कि आबकारी विभाग के अधिकारियों की सोच इसके विपरीत ही चल रही है। आबकारी अधिकारी 16 प्रतिशत शीरा आरक्षण को भी कम मानते हैं। आबकारी विभाग के सूत्रों का कहना है कि उनके द्वारा नए शीरा सत्र 2019-20 के लिए शीरा आरक्षण 18 फीसद प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, अभी इस पर कैबिनेट से निर्णय होना बाकी है। यहां यह बताना जरूरी है कि इससे पहले आबकारी विभाग ने जो प्रस्ताव तैयार किया था, उसमें तो शीरा आरक्षण 16 से बढ़ाकर सीधे 20 फीसदी करने का प्रस्ताव सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया था। गौरतलब हो चीनी मिलों में उत्पादित शीरे का देशी शराब निर्माताओं के लिए आरक्षण बंद करने की मांग लम्बे समय से तमाम चीनी संगठनों के अलावा किसान संगठन भी उठाते रहें हैं। उनका कहना है कि शराब का निर्माण शीरे से करने के बजाए अनुपयुक्त अनाज, फल व अन्य शर्करा युक्त वस्तुओं से ही किया जाए। खैर, शीरा आरक्षण की सीमा न बढ़ाई जाए,इस पर तो किसान चीनी मिल मालिकों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं,लेकिन किसान संगठन इसके साथ ही यह भी जोड़ देते हैं कि शीरा बिक्री से चीनी मिलों को होने वाली आय को गन्ना मूल्य भुगतान में शामिल किया जाना चाहिए। molasses policy in uttar pradesh by yogi के लिए इमेज परिणामबताते चलें यूपी में भले ही शीरा आरक्षण पर सरकारी दखलंदाजी देखने को मिलती हो, लेकिन मध्य प्रदेश व हरियाणा सहित कई राज्यों में शीरा पूरी तरह नियंत्रण मुक्त है। अन्य राज्यों का उदाहरण देकर चीनी संघ समय-समय पर आरोप भी लगाता रहा है कि आरक्षण के जरिए सस्ते में शीरा खरीदने का लाभ देशी शराब उत्पादन में लगे चंद लोगों को ही होता है। असंगत शीरा नीति से उन लघु व मध्यम उद्योगों जैसे पशु व कुक्कुट आहार, विभिन्न खाद्य पदार्थ निर्माण, यीस्ट एवं तंबाकू आदि को लाभ नहीं मिल पाता है। इन छोटे उद्योगों में लगे उद्यमियों को महंगा शीरा खरीदने के लिए बाध्य होना पडता है। कई चीनी मिल और किसान संगठनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर शीरे को नियंत्रण मुक्त करने की मांग की है। शीरा आरक्षण के खेल में कैसे-कैसे दांव चले जा रहे हैं,इसकी बानगी देखिए। पहले तो शीरा आरक्षण सीमा बढ़ाए जाने का तर्क देने वाले आबकारी विभाग ने शीरा आरक्षण 16 से बढ़ाकर 20 फीसदी करने का प्रस्ताव तैयार किया। फिर प्रस्ताव में ही 20 से घटाकर 18 फीसद कर दिया। इसमें तर्क ये दे दिया कि बीते साल अपेक्षा के अनुरूप शराब का उत्पादन कम हुआ और मौजूदा वर्ष में गन्ने की पैदावार कम हुई है। आबकारी विभाग का कहना है कि शीरा वर्ष 2018-19 में जो लक्ष्य तय था, उसके अनुरूप उत्पादन नहीं हुआ। विभाग ने 545 लाख क्विंटल का अनुमानित उत्पादन रखा था लेकिन, 480 लाख क्विन्टल का उत्पादन ही हो पाया, जबकि इस वर्ष गन्ना विभाग ने आबकारी विभाग को 479 लाख क्विंटल का शीरा देने की बात कही है, जो पिछले वर्ष की अपेक्षा 10 फीसद कम है। इन दोनों स्थिति को देखते हुए शीरा आरक्षण में नया प्रस्ताव तैयार किया गया है।

Updated : 23 Oct 2019 9:06 AM GMT
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