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शिवराज का नया शिगूफा

शिवराज का नया शिगूफा
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‘समृद्ध मध्य प्रदेश’ को जिस तरह से पहले सरकारी अभियान के तौर पर और फिर आचार संहिता लगने के बाद भाजपा के अभियान के तौर पर पेश किया गया है वो अभूतपूर्व है. जनता के पैसे से चुनाव लड़ने का यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है.रिपोर्ट ¦ जावेद अनीसबीते डेढ़ दशक से मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है. इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने की वजह से सत्ता विरोधी लहर का होना स्वाभाविक है. पार्टी की तरफ से कराए गये अंदरूनी सर्वे और ताजा ओपेनियन पोल भी इसी तरफ इशारा करते हैं. उसे विपक्षी कांग्रेस से भी कड़ी चुनौती मिल रही है. इन सबके चलते इस बार मध्य प्रदेश में भाजपा का चुनावी गणित डगमगाया हुआ लग रहा है. ऐसे में एंटी इनकंबेंसी से निपटने के लिए भाजपा नित नए प्रपंच आजमा रही है, ‘समृद्ध मध्य प्रदेश’ इस कड़ी का नया शिगूफा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीब ढाई महीने के जन आशीर्वाद यात्रा के बाद अब ‘भविष्य का संदेश, समृद्ध मध्य प्रदेश’ अभियान की शुरुआत की है. 21 अक्टूबर से शुरू किये गए इस अभियान के तहत भाजपा प्रदेश की जनता से नए आइडियाज मांग रही है, जिससे प्रदेश की समृद्धि का रोड मैप बनाया जा सके. 5 नवंबर तक चलने वाले इस अभियान की शुरुआत करते हुए शिवराज ने कहा कि ‘प्रदेश की समृद्धि का रोड मैप मैं अकेला नहीं, साढ़े सात करोड़ लोग मिलकर बनाएंगे. इस दौरान जनता से जो भी अच्छे सुझाव मिलेंगे, उनके आधार पर हम रोडमैप तैयार करेंगे और अगले पांच सालों में प्रदेश को समृद्ध मध्य प्रदेश बनाएंगे.’फ्यूचर एमपी टास्क फोर्स ही समृद्ध मध्य प्रदेश अभियान है?बता दें कि समृद्ध मध्यप्रदेश अभियान के लिए 50 डिजिटल रथ तैयार किए गए हैं जो एलईडी स्क्रीन, साउंड सिस्टम और अन्य उपकरणों से लैस हैं. ये डिजिटल रथ प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचकर जनता को सुझाव देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, साथ ही इसके जरिए भाजपा शासन के 15 साल के दौरान किए गए विकास कार्यों का प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है. दरअसल यह एक सरकारी अभियान था, जिसे शिवराज सरकार द्वारा आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले ‘फ्यूचर एम.पी. टास्क फोर्स’ नाम से चलाया जा रहा था, जिसकी पंच लाइन थी- ‘आइडिया में हो दम, तो पूरा करेंगे हम’. आचार संहिता लागू होने के कुछ ही हफ्तों पहले शुरू किए गए ‘फ्यूचर एम.पी. टास्क फोर्स’ के बारे में इसकी वेबसाइट पर जो जानकारी दी गई है, उसके अनुसार इसका गठन एक ऐसी समिति के रूप में किया जा रहा है जो भविष्य का रोडमैप कैसा हो, इस पर काम करेगी. इस टास्क फोर्स में एक कार्यकारिणी बनेगी जिसमें सरकार के प्रमुख विभागों के लोग शामिल होंगे व एक सलाहकार परिषद होगा जिसमें देश के अंदर विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले विशेषज्ञ शामिल किये जाएंगे. ये सब मिलकर साथ में विचारपूर्वक चिह्नित किऐ गए क्षेत्रों में विकास के लिए आवश्यक उन उपायों की खोज कर उनको कार्यान्वित करेंगे, जो मध्य प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करें.जाहिर है कि यह एक सरकारी कार्यक्रम था, जिसका सिर्फ नाम बदला कर भाजपा अपने चुनावी अभियान के रूप में उपयोग कर रही है. शिवराज सिंह सरकार पर हमेशा से ही सरकारी खजाने के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं लेकिन इस बार जिस तरह से सरकारी मशीनरी और संसाधन का उपयोग किया जा रहा है, वो अभूतपूर्व है. इससे ठीक पहले शिवराज द्वारा निकाले जा रहे जनआशीर्वाद यात्रा में भी सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लग चुके हैं, जिस पर हाईकोर्ट के ग्वालियर बेंच द्वारा नोटिस जारी करते हुये जन आशीर्वाद यात्रा में हो रहे खर्चों का हिसाब मांगा था.क्या कारगर होंगे पुराने हथियार?मध्य प्रदेश में भाजपा पिछले तीन चुनावों से अपनी जीत के लिए प्रमुख रूप से कांग्रेस की आपसी गुटबाजी और दिग्विजय सिंह के दस साला कार्यकाल पर ही निर्भर रही है. इस बार भी भाजपा की रणनीति मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पंद्रह साल पुराने कार्यकाल को निशाने पर लेते हुए खुद को पेश करने की है. इसकी बानगी तब देखने को मिली, जब ‘समृद्ध मध्य प्रदेश’ अभियान को हरी झंडी दिखाते हुए शिवराज सिंह ंने कहा कि ‘कांग्रेस ने मध्य प्रदेश को बर्बाद कर दिया. पूरी की पूरी एक पीढ़ी बर्बाद कर दी है. 2003 में जब हमने प्रदेश की कमान संभाली थी तब प्रदेश का हाल बेहाल था, हमने जी-जान लगाकर प्रदेश की उन्नति और प्रगति के लिए कार्य किया और प्रदेश को बीमारु से जुझारू, जुझारू से सुचारू बनाने में कामयाब हुए.’ लेकिन राजनीति में 15 साल एक लंबा अरसा होता है और इस दौरान एक नई पीढ़ी वोटर के तौर पर सामने आ चुकी है. ऐसे में भाजपा का यह पुराना दांव एक बार फिर काम करेगा, इसको लेकर संदेह है.दूसरी तरफ इस बार कांग्रेस अपनी पुरानी गुटबाजी से काफी हद तक उबर चुकी है और कम से कम पहले की तरह गुटबाजी सतह पर तो नजर नहीं आ रही है. इस चुनाव के दौरान कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय कर दी गई है और सभी नेता अलग-अलग लेकिन एक टीम के रूप में काम करते हुए नजर आ रहे हैं. दिग्विजय जैसे नेता जिनको भाजपा ‘मिस्टर बंटाधार’ के खिताब से नवाज कर चुनावी मुद्दा बनाती थी, वो रणनीति के तहत परदे के पीछे सक्रिय हैं. ऐसे में नहीं लगता कि भाजपा के ये हथियार इस बार काम करेंगे.जमीनी हालत पतलीमध्य प्रदेश में इस बार भाजपा के लिए जमीनी हालत अनकूल नहीं लग रहे हैं. मंदसौर गोलीकांड के बाद से किसानों का शिवराज सरकार के खिलाफ आक्रोश बना हुआ है. दूसरी तरफ राहुल गांधी पूरे प्रदेश में घूम-घूम के ऐलान कर रहे हैं कि अगर मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो 10 दिन के भीतर किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा. किसानों के आक्रोश का सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को मालवा-निमाड़ में होने की संभावना है. यह भाजपा और संघ का गढ़ माना जाता है. वर्तमान में इस क्षेत्र की अधिकतर सीटों पर भाजपा का ही कब्जा है.विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ओबीसी और सवर्ण मतदाताओं का गुस्सा भी भाजपा का गणित बिगाड़ सकता है. एससी/एसटी एक्ट संशोधन में उभरा स्वर्ण आंदोलन मुख्य रूप से भाजपा के ही खिलाफ है. इस आंदोलन से एक नई पार्टी भी तैयार हो गई है, जो भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकती है. भाजपा के अंदरूनी सर्वे भी पार्टी के लिए चिंताजनक हैं जिसमें पाया गया है कि चालीस फीसदी से अधिक मौजूदा विधायकों और मंत्रियों के खिलाफ जनता और कार्यकर्ताओं में नाराजगी है. ऐसे में खबरें आ रही हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा अपने करीब 80 मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है. संघ की तरफ से भी कुछ इसी तरह का फीडबैक सामने आ रहा है. हालिया ओपिनियन पोल भी मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के संकेत दे रहे हैं. विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित होने के बाद एबीपी न्यूज द्वारा दिखाए गए ओपिनियन पोल में बीजेपी को 108 तो कांग्रेस को 122 सीटें दी गई हैं.मध्य प्रदेश में भाजपा चौथी बार सत्ता में वापस आने के लिए हर उस फार्मूले को अपना रही है, जो उसे सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा सके, लेकिन इसके लिए वो लोकतांत्रिक मर्यादाओं की सारी हदें पार कर रही है. इस बार भाजपा और शिवराज जिस धड़ल्ले और बेशर्मी से अपने चुनावी अभियान के दौरान सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं, वो चिंताजनक है. जन आशीर्वाद यात्रा के बाद ‘समृद्ध मध्य प्रदेश’ को जिस तरह से पहले सरकारी अभियान के तौर पर और फिर आचार संहिता लगने के बाद भाजपा के अभियान के तौर पर पेश किया गया है वो अभूतपूर्व है. जनता के पैसे से चुनाव लड़ने का यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है. बहरहाल यह आने वाला समय ही बताएगा कि कहीं ‘समृद्ध मध्य प्रदेश’ शिवराज के लिए ‘इंडिया शाइनिंग’ जैसा नारा तो साबित होने वाला नहीं है?

Updated : 17 Nov 2018 7:57 AM GMT
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