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देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए अहम समस्या बना सऊदी अरब के ऊपर होने वाला हमला

देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए अहम समस्या बना सऊदी अरब के ऊपर होने वाला हमला
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नई दिल्ली, ब्यूरो | यह सऊदी अरब के कच्चे तेल के उत्पादन में आई अब तक की सबसे बड़ी बाधा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है और दुनिया की 10 फीसदी तेल की आपूर्ति करता है। ऐसे में इसका भारत पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि सऊदी अरब, इराक के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है। तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हालांकि इस आशंका से इनकार किया है कि भारत पर इसका कोई असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'हमें भरोसा है कि इससे हमारी तेल आपूर्ति बाधित नहीं होगी, लेकिन सरकार स्थिति पर बराबर नजर रख रही है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि अगर इसके कारण तेल की कीमतें बढ़ीं और लंबे समय तक ऊंची कीमत बनी रही तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 83 फीसदी तेल का आयात करता है।

एनर्जी एंड करेंसी रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट अनुज गुप्ता ने कहा, 'सऊदी की अरामको कंपनी पर ड्रोन हमले के कारण कच्चे तेल की कीमत और बढ़ सकती है, क्योंकि यह कंपनी ओपेक के कच्चा तेल उत्पादन में पांच प्रतिशत का योगदान करती है। सोमवार को स्थानीय वायदा बाजार में कच्चे तेल की कीमत 15 प्रतिशत बढ़ गई, जो जनवरी 1990 के बाद सर्वाधिक वृद्धि है। यह भारतीय रुपये पर नकारात्मक असर डालती, क्योंकि आयात बिल बढ़ सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमत में यह वृद्धि बनी रहती है तो पेट्रोल, डीजल की कीमत तीन-सात रुपये तक बढ़ सकती है और इससे रुपये में भी गिरावट आ सकती है। अनुज गुप्ता ने कहा कि अगर हमले के जवाब में सैन्य कार्रवाई हुई तो मध्य पूर्व में भूराजनीतिक तनाव पैदा होगा। यह भी एक नकारात्मक पक्ष है और इससे वैश्विक आर्थिक हालात अस्थिर हो सकते हैं।

Updated : 18 Sep 2019 5:16 AM GMT
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