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एक बुजुर्ग ने 83 वर्ष कि उम्र में मास्टर्स की डिग्री लेकर साबित कर दिया है कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती

एक बुजुर्ग ने 83 वर्ष कि उम्र में मास्टर्स की डिग्री लेकर साबित कर दिया है कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती
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पंजाब, ब्यूरो | 83 साल की उम्र में मास्टर्स की डिग्री हासिल करके सोहन सिंह गिल ने यह साबित कर दिया है कि सीखने में कभी देर नहीं होती है, और पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती है। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में आयोजित वार्षिक दीक्षांत समारोह में उन्हें मास्टर की डिग्री से सम्मानित किया गया। वह 61 साल से मास्टर की पढ़ाई पूरी करना चाहते थे। लेक्चरर रहे पंजाब के जिला होशियारपुर के सोहन सिंह गिल ने 83 साल की उम्र में एमए इंग्लिश की डिग्री हासिल कर इसी जज्बे का परिचय दिया है। वह पूर्वी अफ्रीकी केन्या में शिक्षा के क्षेत्र में 33 साल तक सेवाएं देकर देश लौटे और फिर यहां की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करके अपनी 61 साल पुरानी इच्छा पूरी की। इस साल उन्हें लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मास्टर की डिग्री हासिल की. आपको बता दें, होशियारपुर के सोहन सिंह इंटरनेशनल हॉकी में ग्रेड अपांयर भी रहे हैं। उन्होंने केन्या हॉकी अंपायर्स एसोसिएशन में 6 साल काम किया और उसके सचिव पद पर भी रहे।

कोस्ट हॉकी एसोसिएशन के चेयरमैन के दौर पर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं। सोहन सिंह कहते हैं कि 1958 में केन्या के लिए वीजा खुला था। तब वे अपने साडू सेवा सिंह बड़ैच के साथ वहां चले गए थे। उस समय चार रुपये किराया हुआ करता था। वाइस प्रिंसिपल वरियाम सिंह कहते थे कि एमए इंग्लिश लें। उनके मन में भी इंग्लिश में एमए की डिग्री लेने की इच्छा थी। ऐसे में केन्या में रहते हुए भी एमए इंग्लिश के सपने आते थे। एक तरह से अधूरी ख्वाहिश का सपना रह रहकर सताता था। रिटायरमेंट के बाद देश लौटेने पर यहां के स्कूलों में पढ़ाया। वह साल 2017 में रिटायर हो गए। रिटायरमेंट के बाद गांव में बैठे-बैठे अधूरी ख्वाहिश पूरी करने का विचार आया। इसे पूरा करने के लिए पत्नी जोगिंदर कौर ने भी हौसला दिया। बेटा अमेरिका में बतौर इंजीनियर सेटल है। वहां से बेटे ने भी हिम्मत बढ़ाई। देश लौटने पर उन्होंने 15 सालों तक बिंजो पब्लिक स्कूल, पांच साल संत बाबा भाग सिंह पब्लिक स्कूल बिंजो में अंग्रेजी पढ़ाई। उनके पढ़ाए हुए बच्चे 94 फीसदी तक अंक लाते थे। साल 2017 में उन्होंने पढ़ाना छोड़ दिया था। रिटायरमेंट के बाद 28 साल गांव में रहते हुए उन्होंने गांव में ही गुरुद्वारा साहिब का निर्माण करवाया और वहां की सेवा भी संभाली।

Updated : 22 Sep 2019 8:56 AM GMT
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