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शिक्षा में गुणात्मक विकास और मानवीय शिक्षा के लिए सहअस्तित्ववादी शोध आवश्यक - प्रो. आशा शुक्ला

शिक्षा में गुणात्मक विकास और मानवीय शिक्षा के लिए सहअस्तित्ववादी शोध आवश्यक - प्रो. आशा शुक्ला
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उदय सर्वोदय ब्यूरो

अंबेडकर विवि में मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्ववाद शोध पीठ का शुभारंभ

महू/सागर: पूर्व के देशों में स्वयं और संबंध पर काम हुआ है इस कारण परिवार और व्यवहार परंपराएं बनी हुई हैं। पश्चिम में भौतिकवाद पर काम हुआ, जिससे बहुत सारे सिस्टम विकसित हुए और तकनीकी का विकास हुआ। अब समय आ गया है जब पूर्व और पश्चिम आपस में मिल सकते हैं। मध्यस्थ दर्शन से अस्तित्ववाद के अनुसंधान से दोनों के समन्वयक के रास्ते का उदय हुआ है। उन्होंने प्रश्न उठाते हुए कहा कि मानव में स्प्रिट क्या है रैंडम है या मानव नियम से कार्य करेगा। डा. बी आर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की यह पीठ दोनों के सहअस्तित्व पर कार्य कर शिक्षा में मानवीय दृष्टि का विकास करेगी, उक्त विचार आईआईआईटी हैदराबाद के संस्थापक निदेशक और बीएचयू आईआईटी के पूर्व निदेशक प्रो. राजीव संगल ने शोध पीठ के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए व्यक्त किए। इससे पूर्व विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशा शुक्ला ने मध्यस्थ दर्शन से अस्तित्ववाद शोध पीठ के विश्वविद्यालय में शुभारंभ की घोषणा करते हुए कहा कि श्रद्धेय नागराज के अनुसंधान के लोकव्यापीकरण में इससे एक और आयाम जुड़ेगा। उन्होंने प्रारंभिक प्रस्ताव विश्वविद्यालय को प्रस्तुत करने के लिए श्रद्धेय नागराज की पुत्री शारदा शर्मा अमरकंटक का आभार व्यक्त किया और शोध पीठ की मानक आचार्य सुनीता पाठक को को बधाई देते हुए अपेक्षा व्यक्त की कि यह शोध पीठ विशेष व्याख्यान, शोध परियोजनाओं, पुस्तक लेखन आदि से मानव में समरसता और शिक्षा के मानवीकरण के क्षेत्र में कार्यों को करेगा।


इस अवसर पर श्रद्धेय नागराज की पुत्री शारदा शर्मा ने बताया कि उनके पिताजी ने किस प्रकार यह ज्ञान को समाधि-संयम साधना विधि अमरकंटक में प्राप्त किया और उसे चार दर्शन, तीन वाद, तीन शास्त्र और मानवीय आचार संहिता रूपी मानव संविधान वांग्मयम 1970 से 2010 में रचित किए। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न विश्वविद्यालय इस पर आधारित यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यू की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं उन्होंने शोध पीठ में परिवार केन्द्रित शोध और तुलनात्मक अध्ययन करने की अपेक्षा व्यक्त की है।


शोध पीठ की मानद आचार्य सुनीता पाठक ने अपने प्रस्तावना वक्तव्य में मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्ववाद के अनुसंधान से शिक्षा वस्तु में गुणात्मक विकास की संभावनाओं पर प्रकाश प्रकाश डालते हुए दर्शन के मुख्य सिद्धांतों की अवधारणा को प्रस्तुत किया। समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में मध्यस्थ दर्शन के अध्येता राकेश गुप्ता ने आदर्शवाद और भौतिकवाद के विकल्प के रूप में सहअस्तित्ववाद का तुलनात्मक स्वरूप प्रस्तुत किया और मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्व शोध पीठ से अनुसंधानकर्ता नागराज जी की अपेक्षाओं को बताया।

कार्यक्रम का संचालन ब्राउस महू के परामर्शी नेक और मीडिया डॉ सुरेंद्र पाठक ने किया। जिसमें विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के शिक्षकों का सहयोग रहा।

Updated : 9 Oct 2021 7:37 AM GMT
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Shivani

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