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योग में ही हमारी शारीरिक, मानसिक, समस्या का समाधान: बाबा रामदेव

उत्तराखंड के हरिद्वार में सोमवार को सातवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सोमवार को पतंजलि योगपीठ में स्वामी रामदेव तथा आचार्य बालकृष्ण के सान्निध्य में पतंजलि योगपीठ स्थित योगभवन सभागार में कार्यक्रम में ‘योग फार वेलनैस’ की थीम पर येागाभ्यास किया गया।

योग में ही हमारी शारीरिक, मानसिक, समस्या का समाधान: बाबा रामदेव
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एजेंसी

हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार में सोमवार को सातवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सोमवार को पतंजलि योगपीठ में स्वामी रामदेव तथा आचार्य बालकृष्ण के सान्निध्य में पतंजलि योगपीठ स्थित योगभवन सभागार में कार्यक्रम में 'योग फार वेलनैस' की थीम पर येागाभ्यास किया गया। चारों वेद, उपनिषद्, दर्शन तथा श्रीमद्भगवतगीता की पावन ऋचाओं के वाचन के मध्य योग का शंखनाद करते हुए स्वामी रामदेव ने स्वस्थ जीवन एवं निरोगी काया की प्राप्ति के लिए योग को एकमात्र साधन बताया।

इस अवसर पर स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि योगसूत्रा आधरित एक वेबसाइट का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि व्यष्टि से समष्टि तक की यात्रा है योग। यौगिक स्केटिंग, यौगिक जिम्नास्टिक, मल्लखम्भ, मल्लयुद्ध यौगिक मुद्राओं और झांकियों के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई।

बाबा रामदेव ने बताया कि इस वेबसाइट के माध्यम से एक साथ पाँच भाषाओं यथा- हिंदी, संस्कृत, जर्मन, फ्रेंच तथा अंग्रेजी में योगसूत्रा उपलब्ध होंगे। उन्होंने की योग अब अंतरराराष्ट्रीय स्तर पर किया जाने लगा है । अतः सभी के लिए योग को सुलभ बनाने के लिए आज कई भाषाओं में योगा सूत्रों को वेबसाइट के माध्यम से लांच किया गया है। उन्होंने कहा कि आज के इस युग में योग धर्म सर्वाेपरि है, योगधर्म ही युग धर्म, राष्ट्र धर्म, सेवा धर्म, मानव धर्म, अध्यात्म धर्म तथा भागवत धर्म है। योग में ही हमारी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक, धर्मिक तथा आध्यात्मिक सभी सभी प्रकार की समस्याओं का समाधन है। योग फाॅर हेल्थ, योग फाॅर वैलनेस, योग फाॅर पीस, योग फाॅर हार्माेनी ये योग के विभिन्न आयाम है। योग एक ब्रह्मास्त्रा है जिससे हम अपने शरीरबल, मनोबल, आत्मबल को प्रबल करके अपने जीवन का निर्माण करते हुए अंत मे निर्वाण मोक्ष को प्राप्त होते हैं।

स्वामी जी ने आह्नान किया कि मात्रा एक दिन के लिए नहीं प्रतिदिन योग करने का संकल्प लें। योगमय जीवन के माध्यम से योगवृत्ति, यज्ञवृत्ति, आयुर्वेदवृत्ति, प्राकृर्तिकवृत्ति, स्वदेशिवृत्ति, राष्ट्रवृत्ति, अध्यात्मवृत्ति बनकर राष्ट्र के लिए उपयोगी बनें। वैयत्तिफक, पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धर्मिक, आध्यात्मिक, जीवन के हर संदर्भ में हमें एक समग्र दृष्टि रखनी है। वेद, शास्त्र तथा हमारे पूर्वज भी हमें यही दृष्टि प्रदान करते हैं।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि आज सातवाँ अंतराष्ट्रीय योग दिवस पूरा विश्व पूर्ण उल्लास के साथ मना रहा है। जैसे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रयास से योग 200 देशों में पहुँचा है, वैसे ही बाबा रामदेव के प्रयास से 200 देशों में पतंजलि से जुड़े भाई-बहन योग का कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।

आचार्य ने कहा कि कोरोना काल की विषम परिस्थितियों ने दिखाया है कि योग में कितनी शक्ति, ताकत एवं दम है। अब योग की परीक्षा नहीं, योग का आचरण होना चाहिए, योग का जीवन में आत्मसात होना चाहिए। हम योगी बनेंगे, तो निरोगी रहेंगे। जितना हम निरोगी होंगे उतना ही देश व समाज के लिए उपयोगी व उपकारी सिद्ध होंगे।

इससे पूर्व बाबा रामदेव, आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि योगपीठ परिवार और पतंजलि परिवार से जुड़े लाखों-लाखों भाई-बहनों की ओर से सम्पूर्ण देशवासियों को सातवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए सबके सुस्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की।

Updated : 21 Jun 2021 11:41 AM GMT
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Shivani

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