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शिक्षकों को तैरकर जाना पड़ रहा है स्कूल, क्या ऐसे बढेगा इंडिया

शिक्षकों को तैरकर जाना पड़ रहा है स्कूल, क्या ऐसे बढेगा इंडिया
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ओडिशा, ब्यूरो | शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादातर छात्रों की ही बात होती है । अब नज़र डालते हैं शिक्षकों की ओर । वो क्या है कि छात्रों को सुविधा मिल रही है कि नहीं ये तो हमेशा देखा जाता है, जांचा जाता है, लेकिन उनको शिक्षा देने वाले गुरुओं को सुविधा मिल रही है कि नहीं इसकी जांच होना भी बहुत जरुरी है । इस से जुड़ा एक मामला ओडिशा से सामने आया है । ओडिशा की बिनोदिनी समल हिम्मत का दूसरा नाम लगती हैं । बिनोदिनी पेशे से प्राइमरी स्कूल टीचर हैं और रोज़ स्कूल जाती हैं । खबर ये है कि स्कूल तक पहुंचने के लिए हर दिन वो गले तक चढ़ी नदी को तैरकर पार करती हैं ।

बिनोदिनी समल 49 साल की हैं । ओडिशा के ढेनकेनाल ज़िले के राथियापला प्राइमरी स्कूल में पढ़ाती हैं। वो साल 2000 में कॉन्ट्रेक्ट पर रखे गए हज़ारों गण-शिक्षकों में से एक हैं । स्कूल के रास्ते में एक नदी पड़ती है । बारिश के दिनों में नदी का पानी बढ़ जाता है । नदी पर कोई पुल नहीं है । बरसों पहले 40 मीटर का एक पुल बनाने की बात चली तो थी लेकिन अभी तक वो सरकारी काग़ज़ों में ही है । होने को बिनोदिनी भी सरकारी काग़ज़ों में रोज़ स्कूल में हो सकती थीं । इस महादेश के दूर दराज में ऐसे अनगिनत स्कूल हैं । जहां रजिस्टर में रोज़ मास्टर और बच्चे पहुंचते हैं । अगर आप रजिस्टर के हिसाब से सच्चाई ढूंढ़ने निकलेंगे तो पता चलेगा कि रजिस्टर में दर्ज हुए मास्टर और बच्चे महज़ एक कल्पना हैं ।

Updated : 12 Sep 2019 9:15 AM GMT
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