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संतों का गुस्सा काम कर गया, राम मंदिर को लेकर मोदी सरकार ने की बड़ी पहल

संतों का गुस्सा काम कर गया, राम मंदिर को लेकर मोदी सरकार ने की बड़ी पहल
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नई दिल्ली (ब्यूरो रिपोर्ट) : राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर मोदी सरकार ने बड़ा दांव खेला है. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उसने कहा है कि अयोध्या में जो विवादित स्थल पर हिंदू पक्षकारों को जो जमीन दी गई है, उसे रामजन्मभूमि न्यास और गैर विवादित जमीन को भारत सरकार को सौंप दिया जाए. माना जा रहा है कि इस फैसले को राम मंदिर निर्माण को लेकर बरती जा रही मोदी सरकार की ढिलाई पर संतों की नाराजगी प्रमुख वजह है.बता दें कि इस मामले को लेकर मंगलवार को यानी आज ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन जस्टिस बोबडे के छुट्टी पर चले जाने की वजह से सुनवाई टल गई. भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर बताया, ‘राम जन्मभूमि मामले में केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. राम जन्मभूमि विवाद मामले में केंद्र सरकार ने बड़ा दांव चला है. केंद्र इस केस में आज सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. सरकार ने अयोध्या विवाद मामले में विवादित जमीन छोड़कर बाकी जमीन को लौटने की मांग की है और इस पर जारी यथास्थिति हटाने की मांग की है. सरकार के इस कदम का हिंदूवादी संगठनों ने स्वागत किया है.’https://twitter.com/Swamy39/status/1090100566473216001गौरतलब है कि अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के आसपास की करीब 70 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के पास है. इसमें से 2.77 एकड़ की जमीन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था. जिस भूमि पर विवाद है वह जमीन 0.313 एकड़ ही है. सरकार का कहना है कि जिस जमीन पर विवाद नहीं है, उसे वापस सौंपा जाए.इससे पहले 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन वह टल गई. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पांच जजों की पीठ कर रही है. जिसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस एस. ए. बोबडे और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ शामिल हैं.जानिए कैसे हुआ था जमीन का बंटवारा?30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अयोध्या विवाद को लेकर फैसला सुनाया था. जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एस.यू. खान और जस्टिस डी.वी. शर्मा की बेंच ने अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांट दिया था. जिस जमीन पर रामलला विराजमान हैं, उसे हिंदू महासभा, दूसरे हिस्से को निर्मोही अखाड़े और तीसरे हिस्से को सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया गया था.

Updated : 29 Jan 2019 6:27 AM GMT
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