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दिल्ली में दिखने लगा है पंजाब और हरियाणा से आने वाले पराली के धुंए का असर

दिल्ली में दिखने लगा है पंजाब और हरियाणा से आने वाले पराली के धुंए का असर
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दिल्ली, ब्यूरो | खेतों में फसल के बाद भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए प्राकृतिक खाद के रूप में पराली का उपयोग किया जाता है। इस दौरान परालियों को खेतों में फैला कर जलाया जाता है। इसके बाद पराली की राख पर पहली बारिश पड़ते ही वह भूमी और अधिक उपजाऊ हो जाती है। लेकिन पाराली से उठने वाला जहरीला धुंआ इंसान के जीवन के लिए हानिकारक होता है। देश में सबसे ज्यादा अनाज की खेती करने वाले प्रदेश पंजाब तथा हरियाणा हैं। ये दोनों राज्य राजधानी दिल्ली के सबसे नजदीक हैं। वायु की दिशा के कारण पराली के धुंए का असर दिल्ली में देखने को मिलता है। केंद्र सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी फिर से परालियों जलना शुरू हो गयी हैं। हालांकि रिपोर्ट मिलते ही सरकार हरकत में आ जाती है लेकिन सरकार के एक्शन से पहले होने वाली दुर्घटनाओं कीई जिम्मेदारी कौन लेगा।ये विषय बेहद चिंताजनक है, कारण ये है कि अभी तो कटाई शुरू हुई है, और अभी से जब ये हाल है तो कटाई पूरी हो जाने के बाद क्या हाल होगा। आने वाले दिनों में इनके पड़ोसी राज्यों में इस समस्या के कारण दुर्घटनाएं हो सकती हैं। इसके ऊपर अगले हफ्ते केंद्र सरकार की बैठक हो सकती है। बता दें कि इस मामले पर पीएमओ में भीई बैठक हो चुकी है। अधिकारियों ने इस बैठक में तैयारियों का हवाला देकर बैठक समाप्त कर दी थी। पराली के धुंए तथा बारिश के कारण दिल्ली में वायु प्रदुषण की आशंका और बढ़ गयी है। आंकड़ों के मुताबिक 03 अक्टूबर को दिल्ली में पीएम-10 का लेवल 107 था, वहीं 05 अक्टूबर तक इसके बढ़कर 149 के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद की गई है। मंगलवार को पीएम-10 का का लेवल 90 था। बता दें कि वायु की अच्छी गुणवत्ता के लिए पीएम-10 का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर या उससे नीचे होना चाहिए।

Updated : 4 Oct 2019 3:21 AM GMT
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