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भूतही बलान की जनता करेगी चुनाव का बहिष्कार

भूतही बलान की जनता करेगी चुनाव का बहिष्कार
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संतोष कुमार¦बिहार में मधुबनी एवं सुपौल जिला के भूतही बलान कोसी नदी से पीड़ित 56 गांव की जनता द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव में मतदान बहिष्कार आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है. भूतही बलान कोसी नदी से प्रभावित लगभग 100 गांव हैं, लेकिन 56 गांव ज्यादा पीड़ित हैं, जिसकी जनसंख्या लगभग 5 लाख है. एक तरफ तो केंद्र की एनडीए सरकार विकास के नाम पर बड़े-बड़े दावे कर रही है कि यूपीए ने जितना कार्य 70 साल में नहीं किया, उतना हमने 4 साल में करके दिखा दिया है. हमने किसी भी प्रदेश व क्षेत्र के साथ कोई भेदभाव नहीं किया, इसलिए हमारा नारा है- ‘सबका साथ सबका विकास.’ वहीं बिहार सरकार का दावा है कि हम बिहार को नई ऊंचाई पर लेकर गए. पूरे देश में एक पहचान दिलवाई और बिहार से जंगल राज खत्म किया. इन सब दावों के बीच अगर देश के किसी प्रदेश के अंदर किसी क्षेत्र के लोग आम चुनाव का बहिष्कार करें तो यह केंद्र व राज्य सरकार के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है.क्यों हो रहा मतदान बहिष्कारhttps://www.youtube.com/watch?v=ruKPD0Lm_20दरअसल मत बहिष्कार करने का मुख्य कारण है इस क्षेत्र को सरकार, जनप्रतिनिधि, प्रशासन और अधिकारी द्वारा उपेक्षित करना. इस क्षेत्र में सरकार द्वारा चलाई जा रही कई ऐसी योजनाएं हैं, जिनकी शुरु आत तो हुई लेकिन पूरी नहीं हो सकीं. या तो अधर में लटकी हुई हैं या अपनी मर्जी से बंद कर दिया गया.अधर में पड़ी योजनाएं

  1. दरभगा से सकरी, झंझारपुर, घोघरडीहा, निर्मली होते हुए फारिबसगंज तक बड़ी रेल लाइन का निर्माण: इसका शिलान्यास 6जून 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, रेल मंत्री नीतीश कुमार और स्थानीय सांसद देवेंद्र प्रसाद यादव ने किया था. इसकी डेडलाइन 2009-2010 थी, लेकिन शासन-प्रशासन के ढीले रवैए के कारण अभी तक अधर में.
  2. फुलपरास से रामनगर तक मुख्य मार्ग का निर्माण: इस मार्ग के निर्माण हेतु 2012में ढाई करोड़ रु पए स्वीकृत हुआ था. एक माह काम चलने के बाद अचानक बंद कर दिया गया. अधिकारी बताते हैं कि रामनगर गांव मुख्य मार्ग से लिंक हो चुका है, इसलिए काम बंद कर दिया गया. हालांकि वजह दूसरी है.
  3. नरिहया एनएच-57 से भेज जमालपुर तक भूतही बलान के पूर्वी तटबंध का निर्माण: इस तटबंध को नरिहया से रामनगर तक मात्र 4 किलोमीटर बनाकर छोड़ दिया गया. इसके कारण बाढ़ का पानी रामनगर, सुडियाही, ननपट्टी, परसा, मुजीयासी, धनखोड़, कालीपुर इत्यादि गांवों में घुसकर भयंकर तबाही मचाता है.
  4. नरिहया एनएच-57 से भेजा जमालपुर तक सिंगल सड़क को डबल करने की मांग: इस सड़क का निर्माण 2004 में हुआ था. यह अभी जर्जर स्थिति में है. लोगों की मांग है कि इस सड़क को डबल किया जाए. कई बार मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई.
  1. किसनी पट्टी से निर्मली लिंक रोड का निर्माण: यह कार्य 2007 में शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक 50 फीसदी भी काम नहीं हुआ.
  2. परसा से गोरगामा मुख्य मार्ग का निर्माण: 6.85 किलोमीटर लंबाई वाली इस सड़क के निर्माण हेतु 2007-08 में 6 करोड़ का आवंटन किया गया था, जिसका कॉन्ट्रेक्ट एसएस कंस्ट्रक्शन, बेगूसराय कंपनी को दिया गया था. कंपनी आधा-अधूरा कार्य करके 6 करोड़ निकासी करके भाग गई. मार्ग के दोबारा निर्माण हेतु 2013-14 में सरकार ने 11 करोड़ 30 लाख रु पये का आवंटन किया, लेकिन अभी रोड नहीं बन पाई.
  3. इस्लामपुर से कालीपुर होते हुए धनखोड़ गांव तक सड़क निर्माण: बाढ़ में बह गए इस मार्ग के निर्माण हेतु कई बार बिहार सरकार को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई रिस्पांस नहीं मिला.
  4. रेफरल अस्पताल का निर्माण: भूतही बलान क्षेत्र के अंदर अभी कोई भी अस्पताल नहीं है, जिसके कारण सबसे ज्यादा दिक्कत बरसात के समय होती है. यहां एक अस्पताल का होना बहुत जरूरी है.
  5. परसा में उच्च विद्यालय निर्माण: इसके लिए 2008स्वीकृति मिली थी, डीएम द्वारा भूमि मैपिंग का कार्य भी हो चुका लेकिन अभी तक इस कार्य की चर्चा तक नहीं.
  6. स्वास्थ्य केंद्र पर न दवा न डॉक्टर: बिहार सरकार द्वारा उप स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिए गए हैं, लेकिन ज्यादातर केंद्र पर न तो दवा होती है और न ही डॉक्टर उपलब्ध.

Updated : 8 Oct 2018 9:42 AM GMT
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