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साहित्य के 'अभिमंच' पर बिखरे शब्द

साहित्य के अभिमंच पर बिखरे शब्द
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मीनाक्षी पोद्दारसाहित्यिक संगठन ‘अभिमंच’ की पहली वर्षगांठ दिल्ली के हिंदी भवन में मनाई गई. इस दौरान पुस्तक विमोचन, काव्यपाठ, पुरस्कार वितरण आदि कार्यक्रम हुए. इस मौके पर अभिमंच की ओर से दो फेलोशिप की भी घोषणा की गई.30सितंबर 2018 की शाम साहित्यिक संगठन ‘अभिमंच’ की पहली वर्षगांठ दिल्ली के हिंदी भवन में मनाई गई. कार्यक्र म की शुरु आत अभिमंच के सचिव नित्यानंद तिवारी के परिचय से हुई. उन्होंने अपने प्रकाशकीय अनुभव से नए लेखकों एवं कवियों का उत्साहवर्धन किया. अभिमंच के एक साल पूरा होने पर उन्होंने दो फेलोशिप की घोषणा की, जो शिक्षा के क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभावान छात्रों को दिया जाएगा. पहला ‘बहादुर प्रकाश फेलोशिप’ 60 हजार रुपये प्रतिवर्ष एवं दूसरा ‘शेखर मिश्रा फेलोशिप’ 21 हजार रुपये प्रतिवर्ष की होगी. विदित हो कि यह संस्था न्यास अधिनियम के तहत पंजीकृत है.पुस्तक विमोचनइसके बाद दौर शुरू हुआ पुस्तक विमोचन का, जिसमें चार पुस्तकों का विमोचन किया गया. पहली पुस्तक थी अरविंद पांडेय रचित ‘स्वाधीनता की भूख’, दूसरी डॉ. आशा यादव की ‘पंचायती राज में ग्राम प्रधानों की भूमिका’ और विनोद मेरता की अंग्रेजी कविता संग्रह ‘द फर्स्ट स्टेप’. अभिमंच के सदस्यों द्वारा रचित साझा कविताओं के संकलन ‘अभिकाव्य’ का विमोचन मुख्य आकर्षण रहा, जिसका संपादन डॉ. गुरविंदर बांगा ने किया है. सभी पुस्तकें वीएल मीडिया सोलुशंस ने प्रकाशित की हैं.संबोधनअभिमंच के उपाध्यक्ष डॉ. गुरविंदर बांगा ने साझा काव्य संग्रह ‘अभिकाव्य’ के बारे में परिचयात्मक संबोधन किया एवं संस्था के वर्तमान एवं भविष्य की चर्चा की. व्यंग्यकार सुलतान भारती ने संस्था द्वारा किए जाने वाले प्रयासों की सराहना की एवं घोषित फेलोशिप को अद्वितीय कदम बताया. दिल्ली विवि में प्राध्यापिका डॉ. आमना मिर्ज़ा ने संस्था को समाजोन्मुखी बताया. इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में शिक्षाशास्त्र के प्राध्यापक डॉ. धनंजय जोशी और डॉ. राजीव रंजन द्विवेदी ने अभिमंच को साहित्य में शिक्षित करने वाला मंच बताया.काव्यपाठकार्यक्र म का अगला दौर था काव्यपाठ का, जिसमें तरन्नुम के बादशाह कहे जाने वाले मयंक राजेश ने अपनी ग़ज़ल से सबका दिल जीता, वहीं अभिमंच के बच्चन कहे जाने वाले डॉ. राजीव रंजन द्विवेदी ने ‘कविता’ नामक कविता सुनाकर युवा कवियों में जोश भर दिया. प्रो धनंजय जोशी ने अपनी कविता से समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, वहीं व्यंग्य के सुल्तान, सुल्तान भारती ने ग़ज़ल सुनाकर सबका मनोरंजन किया. दिलदार देहलवी ने ग़ज़ल से सभागार को तालियों से भर दिया. इनके अलावा पीयूष कांति, देवेंद्र सिंह, प्रतीक प्रकाश करण, राजदीप, विद्यांश और गार्गी ने भी तालियां बटोरी. रंजना पाण्डेय, कविता कबीरा, नम्रता, संदीप तोमर, सोम मोहापात्रा आदि कवियों ने अपनी रचनाओं से कार्यक्र म को सफल बनाया.पुरस्कार वितरणकार्यक्र म में अगला दौर था पुरस्कार वितरण का. अभिमंच ने अपने पहले सम्मान की घोषणा की. इसके तहत पांच साहित्य सम्मान दिए गए. डॉ. गुरविंदर बंगा को ‘कबीर साहित्य सम्मान’, सुल्तान भारती को ‘प्रेमचंद साहित्य सम्मान’, प्रो बीएन मिश्रा को ‘दिनकर साहित्य सम्मान’, पंकज त्रिवेदी को ‘साहित्य चेतना सम्मान’, मयंक राजेश को ‘अभिकाव्य साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया. ‘उदय सर्वोदय’ के प्रबंध संपादक तबरेज़ खान को उनके पत्रकारिता जगत में किए गए योगदान हेतु सम्मानित किया गया. अभिमंच में अपना अहम योगदान देने के लिए डॉ. उमेश पाठक, डॉ. राजीव रंजन द्विवेदी, प्रो. धनंजय जोशी, कुलदीप मक्कड़ और गरिमा पांडे भी सम्मानित हुए. सभी कवियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्र म की अध्यक्षता प्रो. बीएन मिश्रा ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में पंकज त्रिवेदी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. संचालन डॉ. उमेश पाठक एवं आरती तिवारी ने किया.

Updated : 6 Oct 2018 8:19 AM GMT
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