इस बार इलेक्शन रिजल्ट में होगी देर? जानें पूरा मामला

नई दिल्ली (एजेंसी) :  लोकसभा चुनाव 2019 नतीजों के दौरान पहली बार ईवीएम मशीनों के वोटों का वीवीपैट मशीन से मिलान किया जाना है. हर लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली हर विधानसभा इलाके की पांच ईवीएम मशीनों के वोटों का वीवीपैट से मिलान किया जाएगा, बगैर उसके नतीजे जारी नहीं होंगे. 23 मई को लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों का देशभर को इंतजार रहेगा लेकिन सूत्रों के अनुसार पूरी उम्मीद है कि आखिरी रिजल्ट आने में पांच से छह घंटे की देर लग सकती है. इसका कारण होंगी वीवीपैट पर्चियां, जिनकी गिनती हाथ से की जाएगी.

विपक्ष ने मांग की थी कि वीवीपैट मशीनों और ईवीएम के मतों का मिलान आफिशियल काउंटिंग शुरू होने से पहले ही कर लिया जाए. हालांकि चुनाव आयोग ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है. लिहाजा ये मिलान हर लोकसभा सीट पर वोटों की आफिशियल गिनती खत्म होने के बाद ही होगा. अगर किसी जगह  वीवीपैट और ईवीएम के मतों के आंकड़ों में समानता नहीं पाई जाती तो पांच से ज्यादा ईवीएम और वीवीपैट के मतों का मिलान होगा. इस प्रक्रिया से चुनावों के फाइनल रिजल्ट आने में पांच से छह घंटे का वक्त भी लग सकता है.

आठ अप्रैल को एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग ने कहा था कि चुनाव आयोग को हर जगह वीवीपैट मशीनें लगानी चाहिए. इसके बाद 16 लाख वीवीपैट मशीनों का आर्डर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने हर संसदीय सीट में विधानसभा इलाकों की दृष्टि से कम से कम 5 वीवीपैट और ईवीएम के मतों के मिलान की बात कही. इससे पहले चुनाव आयोग हर लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा क्षेत्रवार मात्र एक ईवीएम और वीवीपैट के मतों का मिलान करने वाला था.

ऐसे अंजाम दी जाएगी पूरी प्रक्रिया

एक लोकसभा सीट पर कई विधानसभा क्षेत्र होते हैं, मतगणना कई जगहों पर एकसाथ चल रही होती है. इसलिए एक चरण पूरा होने के बाद हर विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों को सेंट्रल टेबल पर जोड़ना होता है इसलिए एक चरण से दूसरे चरण के रुझान आने में देरी होगी. लोकसभा चुनाव में विधानसभा चुनाव की तुलना में एक चरण की मतगणना में अधिक वक्त लगता हैं. लोकसभा चुनाव की मतगणना से जुडे दिशा-निर्देश सभी राज्यों को भेजे जा चुके हैं.

वैसे अगर विपक्ष की मांग पर VVPAT पर्चियों का मिलान शुरुआत में ही किया जाता तो पहला रुझान ही दोपहर बाद आना शुरू होता. तब आधिकारिक मतगणना ही दोपहर बाद शुरू हो पाती. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है लेकिन अगर कहीं भी वीवीपैट और ईवीएम के वोटों के मिलान में गड़बड़ी मिली तो जरूर उस सीट पर रिज़ल्ट आने में देर लगेगी.

तो नतीजों में होती 6 दिन की देरीपहले विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से कम से कम 50% ईवीएम और वीवीपैट के मतों के मिलान की मांग की थी. इस बारे में इन दलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मांग को खारिज कर दिया.

इसे खारिज किए जाने का कारण था चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में दिया गया जवाब. चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को जवाब के बारे में बताया था कि अगर चुनाव आयोग विपक्षी पार्टियों की मांग मानते हुए 50% वीवीपैट मशीनों के मतों का ईवीएम से मिलान किया जाए तो चुनावों नतीजे घोषित करने में छह दिन लग जाएंगे.

जिसके बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी दलों की एक अन्य याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने निर्देश दिया कि हर लोकसभा क्षेत्र में कम से कम पांच EVM मशीनों के मतों का वीवीपैट के मतों से मिलान किया जाना चाहिए.

रिव्यू पीटीशन भी हुई खारिज

हालांकि इस मामले में फिर से विपक्षी दलों ने एक रिव्यू याचिका दाखिल की थी. विपक्षी दलों की मांग थी कि चुनाव आयोग कम से कम 25% या 33% ईवीएम और वीवीपैट मशीन के मतों का मिलान करे.  इस याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. 21 मई को भी सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष की ऐसी ही एक याचिका को फिर खारिज किया.

इस मामले के विशेषज्ञ श्रीनिवास रमानी मानते हैं कि ईवीएम और वीवीपैट में कोई गड़बड़ी न हो, ये सुनिश्चित करने के दूसरे रास्ते भी हो सकते हैं. इसके लिए ये किया जा सकता है कि जिन सीटों पर जीतने वाले और दूसरे नंबर पर आने वाले उम्मीदवारों के बीच मतों का अंतर 1% से कम हो, उन सीटों पर ईवीएम और वीवीपैट मशीनों के मतों को आपस में मिलाया जा सकता है ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रह जाए.

रमानी का यह भी मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के पांच ईवीएम और वीवीपैट मशीनों के मतों के आपस में मिलान के आदेश के बाद किसी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका बहुत कम हो गई है.

किन पांच ईवीएम का मिलान वीवीपैट से होगा

– ये तय नहीं है. इसका निर्धारण रेंडम तरीके से सभी प्रत्याशियों के मतगणना केंद्र पर मौजूद एजेंटों की सहमति से किया जाएगा.

2014 के आम चुनावों में भी चुनाव आयोग ने ईवीएम के साथ लगाई थी वीवीपैट मशीन

कम ही लोग जानते होंगे कि चुनाव आयोग ने 2014 के आम चुनावों में भी VVPAT मशीनों का प्रयोग किया था. हालांकि ये वीवीपैट मशीनें 543 में सिर्फ 8 सीटों पर ही प्रयोग हुई थीं. हालांकि उस वक्त इन वीवीपैट मशीनों के वोटों का ईवीएम के वोटों से मिलान नहीं किया गया था.

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