डीजल-पेट्रोल के दाम पर नहीं पड़ेगा यूएस-ईरान तनाव का असर : प्रधान

डीजल-पेट्रोल के दाम पर नहीं पड़ेगा यूएस-ईरान तनाव का असर : प्रधान

देब दुलाल पहाड़ी 

नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इस्पात मंत्रालय देश के पूर्वी क्षेत्र में इस्पात उद्योग से जुड़ी परियोजनाओं में कुल मिला कर 70 अरब डॉलर के निवेश की संभावनाएं देख रहा है। उनकी राय में ये परियोजनाएं क्षेत्र में विकास की गति तेज करेंगी। 11 जनवरी, 2020 को कोलकाता में सीआईआई द्वारा आयोजित “पूर्वोदय सम्मेलन” के दौरान योजना का शुभारंभ करते हुए कहा, “ये योजनाएँ पूर्वांचल के राज्यों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की आगे की राह तय करेंगी तथा प्राकृतिक संसाधनों के धनी को इन राज्यों में सामाजिक और आर्थिक विकास को हासिल करने की आदर्श स्थिति का निर्माण करेंगी।”

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इस अवसर पर , स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल)  के  अध्यक्ष  अनिल कुमार चौधरी ने कहा ,“ इस पहल के साथ सेल राष्ट्र निर्माण की अपनी इस विरासत को आगे भी जारी रखेगी।” ”उन्होंने उद्यमियों को इस पहल में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया और इस्पात क्षेत्रों के पास सर्वांगीण विकास के लिए इस्पाती इरादे के साथ सेल की मदद के लिए आगे आने को कहा ।  चौधरी ने कहा कि उनकी कंपनी के पूर्वी क्षेत्र में पांच कारखाने हैं। उनमें दो करोड़ टन उत्पादन हो रहा है। इंडियन ऑयल के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा कि तेल-गैस पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार से इस्पात की मांग और खपत बढ़ेगी।

प्रधान ने  यह भी कहा की पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उत्तरी आंध प्रदेश, झारखंड और ओडिशा के पिछड़े जिलों के विकास के लिये इन इलाकों में इस्पात उद्योग की परियोजनाओं का बड़ा योगदान हो सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्वी क्षेत्र में कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे खनिज प्रचूर मात्रा में उपलब्ध हैं। इस कारण इस क्षेत्र में इस्पात उद्योग के विकास की बड़ी संभावना है। इस सूची में बिहार को भी शामिल किया जा सकता है। राष्ट्रीय इस्पातनीति 2017 में 2030 तक इस्पात उत्पादन क्षमता 30 करोड़ टन वार्षिक करने का लक्ष्य है। इसमें से 20 करोड़ टन पूर्वी क्षेत्र से आ सकता है। प्रधान ने कहा, ‘‘आज भी देश में सालाना 14 करोड़ टन के इस्पात उत्पादन में नौ करोड़ टन पूर्वी क्षेत्र में हो रहा है।’’

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इस अवसर पर इस्पात मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव रसिका चौबे ने कहा कि पूर्वोदय कार्यक्रम में पूर्वी अंचल में बुनियादी ढांचे और माल लाने-ले जाने की सुविधा की कमी दूर करने की पहल भी होगी। उन्होंने कहा कि भारत को 2024-25 तक 5 हजार अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने में पूर्वात्तर क्षेत्र ‘बहुत सहज और संभावनापूर्ण स्थिति में है।’

कोल इंडिया के चेयरमैन अनिल झा ने कहा, उनकी कंपनी प्रयासरत है कि देश में कोयले के आयात की आवश्यकता कम से कम रह जाए। कंपनी ने 2023-24 तक वर्षिक कोयला उत्पादन 90 करोड़ टन तक करने का लक्ष्य रखा है। अभी उत्पादन स्तर 60.7 करोड़ टन है। इंडियन ऑयल के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा कि तेल-गैस पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार से इस्पात की मांग और खपत बढ़ेगी।

आप को बता दें कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने एक विशेष प्रोत्साहन योजना के जरिये देश भर में स्थित अपने संयत्रों  के आसपास औद्योगिक ढांचे को बढ़ावा देने और समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास हासिल करने के लिए पूर्वोदय में अपनी भागीदारी की शुरुआत की है| “इस्पाती इलाकों का विकास: सेल के साथ”  नाम की इस योजना का उद्देश्य विशेष मूल्य निर्धारण, विशेष वाणिज्यिक शर्तों, इनपुट की उपलब्धता, आसान वित्तपोषण सहायता और स्थानीय एमएसएमई को तकनीकी जानकारी प्रदान करके इस्पात आधारित समूहों को प्रोत्साहित करना है। पूर्वोदय की प्रत्येक राज्य में उपस्थिति के साथ ही, यह योजना एमएसएमई के लिए उन क्षेत्रों में उपलब्ध होगी, जहां सेल के भिलाई, राउरकेला, बोकारो, दुर्गापुर और बर्नपुर इस्पात संयंत्र स्थित हैं ।

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