बिजली की दरों में हो रही वृद्धि के ऊपर बीजेपी बंगाल में मुखर और यूपी में मौन ऐसा क्यों !

बिजली की दरों में हो रही वृद्धि के ऊपर बीजेपी बंगाल में मुखर और यूपी में मौन ऐसा क्यों !

अजय कुमार ¦ लखनऊ

उत्तर-प्रदेश के बिजली उपभोक्ता योगी सरकार को कुम्भ्करणी नींद से नहीं जगा पाए। अगर जगाने में सफल हो जाते तो संभवत: उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन बिजली की दरों में बढोत्तरी के प्रस्ताव पर नियामक आयोग से सहमति की मुहर लगवाने में सफल नहीं हो पाता। नियामक आयोग की सहमति मिलते ही प्रदेश में  12 सितम्बर से घरेलु, कमर्शियल बिजली की दरों में बढोत्तरी लागू हो गयी है, और इसी के साथ उत्तर प्रदेश पुरे देश में सबसे अधिक बिजली की दरें बढ़ने वाला प्रदेश बन गया है। प्रदेश में 12 प्रतिशत बिजली की दरें बढाई गयी हैं। यूपी में बिजली कि दरों के बढ़ने के साथ ही सरकार का दोमुंहापन भी सामने आ गया है। कैसे बीजेपी बिजली पर सियासत कर रही है, इसकी बानगी पश्चिम बंगाल में देखने को मिली है। जहाँ बिजली कि दर बढ़ने के खिलाफ बीजेपी धरना प्रदर्शन कर रही है तो यूपी में इसी मामले के खिलाफ चुप्पी साधे बैठी है। यह सीधा सीधा बीजेपी के द्वारा जनता को दिया जाने वाला धोखा प्रतीत होता है।

उपभोक्ता परिषद् के अध्यक्ष ने बताया कि जब प्रदेश में बिजली की दरों में व्यापक बढोत्तरी प्रस्तावित की गयी तो उस समय यह ढिंढोरा पीटा  गया कि कोयले व कच्चे तेल में बढोत्तरी कि वजह से बिजली की दरें बढानी पड़ रही हैं। अब सवाल यह उठता है कि कोयला और कच्चे तेल में बढोत्तरी इतनी अधिक थी तो निश्चित तौर पर उसका प्रभाव पूरे देश  पर पड़ना चाहिए था। लेकिन इसकी बजाय देश के दर्जनभर राज्यों में ही बिजली की दरें बढाई गयी। गौरतलब हो, उत्तर प्रदेश सहित सभी राज्यों के बिजली वितरण निगमों ने बिजली दरों में व्यापक बढोत्तरी का नियामक आयोग को प्रस्ताव भेजा था। लेकिन यूपी को छोड़कर सभी राज्यों के नियामक आयोगों ने नाम मात्र कि बढोत्तरी की है, या फिर उस पूरे  प्रस्ताव को ही खारिज कर दिया। यूपी के विद्युत उपभोगकर्ताओं का वर्ष 2017-18 तक उदय ट्रूअप के अंतर्गत लगभग 13337 करोड़ बिजली कम्पनियों पर निकल रहा है। इसके बावजूद यूपी में बिजली कि दरें इतनी बढ़ा दी गयी हैं।

अगर बात कि जाए यूपी में बिजली कि दरों के बढ़ने के बाद छिड़ी सियासत की, तो कोई भी दल इसमें पीछे नहीं रहना चाहता। सभी योगी सरकार को घेरने में लगे हैं। विपक्ष के द्वारा लगातार हमलों के बाद यूपी के उर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि, सपा-बसपा के भ्रष्टाचारों के कारण ही बिजली विभाग घाटे में है। इसीलिए ये वृद्धि करनी पड़ रही है।

इस पर अखिलेश यादव का कहना है कि, यूपी में दरों का बढना और पश्चिम बंगाल में दरों के बढ़ने के खिलाफ प्रदर्शन करना यह भाजपा के दोहरे चरित्र का नाटक है। ये सब जनता कि जेब से पैसे उगलवाने के हथकंडे हैं। लेकिन भाजपा याद रखे हर नाटक का अंत जरूर होता है। इसी के साथ कांग्रेस भी विरोध में पीछे नहीं है। हाल ही में बिजली कि दरों को लेकर विधायक दल के नेता अजय कुमार लल्लू कि अगुवाई में एक लालटेन यात्रा भी निकाली गयी थी।

Uday Sarvodaya Team

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