ताज महल के बारे में ये नहीं जानते होंगे आप

नई दिल्ली (डेस्क): ताजमहल के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की संवेदनशील कदमों के चलते यह विश्व धरोहर एक बार फिर चर्चा में है. हालिया दिनों में कभी ताजमहल का रंग काला पड़ने तो कभी इसके नाम बदलने को लेकर इस दुनिया के सबसे बड़े अजूबों वाली इमारत की चर्चा होती रही है. लेकिन इस मनमोहक इमारत को ऐसा स्वरूप किसने दिया? कौन था ताजमहल का डिजाइनर? इन सवालों पर आमतौर पर जितने लोग उतने मत सामने आते हैं और आखिरकार यह सवाल एक पहेली बनकर रह जाता है.

Taj Mahal

हम यहां उन सभी मतों को स्पष्टता से रख रहे हैं और एक सर्वमान्य मत से आपको रूबरू करा रहे हैं कि आखिर वाकई में ताजमहल का डिजाइनर कौन था. ऐसा माना जाता है कि उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित ताजमहल की वास्तुकला किसी एक खास किस्म की वास्तु से नहीं बना है. बल्कि डिजाइनर ने फारसी वास्तु शैली, तुर्की, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला को पिरोकर एक नायाब डिजाइन निकाली थी.

मुगलकाल के कई दस्तावेजों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमजात महल की याद में बनवाए गए इस अजूबे के निर्माण के ‌लिए कुल 37 आर्टिटेक्ट लगाए हुए थे. ताजमहल कई देशों के नायाब की वास्तुकलाओं पर आधारित है. इसलिए कोई इकलौता आदमी ताजमहल की डिजाइन को तैयार नहीं किया.

कई दस्तावेजों से इसका खुलासा हुआ है कि निर्माण जिम्मा बादशाह ने मीर अब्दुल करीम और मुकम्मत खां को सौंपा था. जबकि इनके ऊपर छोटे-छोटे डिजाइनों को अंतिम रूप देने के लिए उस्ताद अहमद लाहौरी को चुना था. यहां एक दिलचस्प तथ्य यह भी कि खुद उस्ताद अहमद लाहौरी ने उस दौर का इतिहास लिखा है. उन्होंने लिखा कि भले उन्हें निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई ‌‌थी और आर्किटेक्ट्स में अबू ईसा, ईसा मोहम्मद एफ्फेंदी, जेरोनिमो वेरोनियो का नाम प्रमुखता से आता हो, पर इसका मुख्य डिजाइनर कोई और था.

Taj Mahal

शाहजहां के दरबारी इतिहासकार और ताजमहल के निर्माण में प्रधान भूमिका अदा करने वाले उस्ताद अहमद लाहौरी लिखते हैं, “बादशाह शाहजहां ने खुद ही एक-‌एक डिजाइन की बानगी चेक की, उनमें अंतर सुझाए और ताजमहल के एक बड़े हिस्से का डिजाइन खुद बनाया है.” इसके बाद ताजमहल बनाने वाले मिस्त्रियों के हाथ कटवाने को लेकर कई बातें होती हैं. लेकिन मुगलकाल के किसी तस्तावेज में इसका जिक्र नहीं मिलता. एक डॉक्‍यूमेंट के अनुसार, ताजमहल बनाने में लगे मजदूरों के लिए मुमताजबाद नाम की जगह बसा दी गई थी. यहां करीबन 5 से 20 हजार लोगों के रहने के साक्ष्य पाए जाते हैं.

Taj Mahal

ताजमहल के कुछ हिस्सों में फारसी नक्काश अमानत खां का नाम लिखा हुआ है. इनमें अमानत खां के साथ दो सालों का जिक्र है- 1635 और 1638. बताया जाता है कि नक्कशी तय होने के बाद इन्हें नक्काशियों को हूबहू जीवित कर देने का काम दिया गया है. जानकारी के अनुसार ताजमहल बनकर खड़े हो जाने के बाद शाहजहां ने चीन, रूस, मिस्र, श्रीलंका और तिब्बत से जवाहरात मंगाए. साल 1643 में ताजमहल बन खड़ा होने के बाद शाहजहां ने इसपर मोतियों की चादर चढ़ाई थी.

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