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    Uday Sarvodaya
    अमृतकाल है या ‘रेप’ काल
    समाज

    अमृतकाल है या ‘रेप’ काल

    Vivek ShuklaBy Vivek ShuklaSeptember 19, 2024Updated:October 8, 2024No Comments4 Mins Read
    Vijay Shukla
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    विजय शुक्ला

    विश्वगुरु की बजाय भारत कहीं रेप गुरु बनने की राह पर तो नहीं हैं. विदुषी पाला, घोषा , गार्गी और मां दुर्गा काली के देश भारत में हालात रेप काल के आ गए हैं. वो अलग बात है कि सरकार अभी भी तीसरी बार अमृतकाल यात्रा की चासनी और उसके इवेंट के चकाचौंध से निकल नहीं पाई हैं. निर्भया काण्ड और उस पर सियासी विलाप से गुजरते भारत ने सत्तासीनों द्वारा चीरहरण से लेकर हत्या और गवाहों की ह्त्या तक का पूरा खेल देखा और ऐसे ही एक मामले में सियासी बाबा का बार-बार पेरोल पर आने का सिलसिला भी इसी अमृतकाल की घटना है. पहलवानों की सियासी छेड़छाड़ पर सांसदी की टिकट गंवा बैठे व्यक्तित्व की पूरी गाथा आपने देखी और सियासी बिसात पर या यूं कहें यादगार मात देने की एक खिलाड़ी के आखिरी पल में हालत के गवाह भी हम ही बने. इधर लेटरल एंट्री पर बवाल से सियासी माहौल में रद्द विज्ञापन की बात गलियारे में इतनी बड़ी बन गयी की देश में हो रहे रेप कांडो का पन्ना धूमिल करने में तंत्र जुट गया पर सभी की निगाह कोलकाता में टिकी और उसको हाथरस से जोड़कर दिखाने का माहौल भी बन गया. कुल मिलाकर हम इतना नीचे गिर चुके हैं कि अब हमारे लिए रेप काल में रेप होना हत्या होना बड़ा मुद्दा या शर्मसार होने की बात होने की बजाय उसका सियासी आकलन बड़ी बात है.
    पुलिस के भरोसे न्याय की उम्मीद करना मन की बात जैसा ही मामला हैं क्योकि भारतीय दंड संहिता का भारतीय न्याय संहिता महज नाम बदलने की प्रक्रिया सरीखा हैं ना कि नीयत और कार्रवाई का. सरकारी कागजो में नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के हिसाब से साल 2012 में रेप केस सालाना 25000 थे तो 2022 यानी दस साल बाद यह आंकड़े तीस हजार पार कर गए. और यह आंकड़े दर्ज किये गए पुलिसिया दहलीज से कितने मामले दफन हो गए या बेरंग लौट गए इसका हिसाब लगाएंगे तो हम सीधा रेप गुरु की उपाधि धारक ही हो जायेंगे.

    इसे भी पढ़ें  ⇒नदियों को पुनर्जीवित कर बदल दी हजारों गांवों की तस्वीर

    हम इतने नीच बनते जा रहे हैं कि दो तीन साल की बच्चियों और बकरियों को अपनी हवस का शिकार बना रहे हैं. यह कलयुगी अधम समाज ही है जहां इंसान तो इंसान पशु भी रेप के शिकार हो रहे हैं. कोलकाता में लेडी डॉक्टर के रेप और हत्या का मामला अभी शांत नहीं हुआ है. इसी बीच अब ठाणे के बदलापुर में दो चार साल की बच्चियों से कथित यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है. घटना की जानकारी मिलने के बाद भारी भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हुई. इतना ही नहीं भीड़ सुबह करीब आठ बजे बदलापुर रेलवे स्टेशन की पटरियों पर आ गई और रेलवे स्टेशन पर ट्रेनें रोक दीं. पुलिस ने सभी को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया. इसमें कई लोग घायल भी हुए हैं.

    डिया रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चियों ने अपने मां-बाप को बताया कि स्वीपर ने उन्हें गलत तरीके से टच किया. इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब बच्ची ने अपने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत की. बाद में उसने अपने माता-पिता को बताया कि वह टॉयलेट का इस्तेमाल करने गई थी, तब आरोपी ने उसके प्राइवेट पार्ट को टच किया. माता-पिता ने फिर स्थानीय डॉक्टर से उसकी जांच करवाई तो बताया गया कि उसके साथ में यौन उत्पीड़न किया गया है. इसके बाद पुलिस ने पोक्सो के तहत केस दर्ज कर लिया है. पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए स्वीपर को अरेस्ट कर लिया है. साथ ही, पुलिस ने उसे अरेस्ट करके कोर्ट से 21 अगस्त तक के लिए रिमांड पर लिया है. इस पूरे वाकया के बाद में स्कूल मैनेजमेंट ने प्रिंसिपल, एक क्लास टीचर और एक महिला अटेंडेंट को सस्पेंड कर दिया है. मैनेजमेंट की तरफ से माफी भी मांगी गई है और उन्होंने जिम्मेदार हाउसकीपिंग फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया है. स्कूल के अधिकारियों ने कहा कि घटना के मद्देनजर स्कूल परिसर में सतर्कता बढ़ा दी जाएगी.

    वहीं ओडिशा में पिछले सप्ताह मोमो सरकार के राज में कोलकाता जैसा ही काण्ड हुआ पर सुर्खियों में नहीं रहा. मुरादाबाद में नर्स के साथ का हादसा भी ऐसा ही हैं. कितनी घटनाओ का जिक्र करेंगे और करे ही क्यों ? क्योकि हमारे अंदर की आत्मा मर चुकी हैं और हम पिशाच सरीखे बनते जा रहे हैं. सरकार और पुलिस से शायद ही यह रेप काल की यात्रा पर विराम लगाया जा सके पर अगर समाज जाग जाय तो शायद इन नर पिशाचो पर लगाम भी लगाया जा सके और महज घोषणाओं में नहीं जमीन पर कानून को बिना अपने पराये और शुभ लाभ का आकलन किये लागू करना होगा.

    (लेखक लोकल न्यूज ऑफ इंडिया के संपादक हैं)

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