नई दिल्ली. भारत के पूंजी बाजार में डिजिटल बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विद्युत मंत्रालय के अधीन महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम और प्रमुख NBFC-IFC आरईसी लिमिटेड ने देश में टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड का पहला पायलट निर्गम सफलतापूर्वक पूरा किया है. यह निर्गम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के रेगुलेटरी सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क के तहत किया गया. इस पायलट इश्यू का कुल आकार 500 करोड़ रुपये था, जिसमें 100 करोड़ रुपये का बेस इश्यू और 400 करोड़ रुपये का ग्रीन शू विकल्प शामिल था. इसकी बोली प्रक्रिया नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) के इलेक्ट्रॉनिक बिडिंग प्लेटफॉर्म पर आयोजित की गई.
796 करोड़ की बोली, मजबूत रहा निवेशकों का भरोसा: आरईसी के इस निर्गम को निवेशकों से जोरदार प्रतिक्रिया मिली. कुल 796 करोड़ रुपये की बुक बिल्डिंग हुई. कंपनी ने 7.30 प्रतिशत वार्षिक कूपन दर पर 1 वर्ष 9 महीने की अवधि के लिए 500 करोड़ रुपये स्वीकार किए. इस निर्गम की खासियत सिर्फ इसकी मजबूत मांग नहीं, बल्कि इसकी सेटलमेंट प्रक्रिया भी रही. टोकनाइज्ड माध्यम के जरिए पे-इन, आवंटन और बॉन्ड की लिस्टिंग एक ही दिन में पूरी की गई. इन बॉन्ड्स को NSE और बीएसई लिमिटेड, दोनों पर सूचीबद्ध किया गया है.
SEBI, RBI और बाजार संस्थानों का समन्वय: आरईसी के अनुसार, इस पायलट की सफलता SEBI, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बाजार अवसंरचना संस्थानों (MIIs) के बीच समन्वय का परिणाम है. इसमें NPCI, डिपॉजिटरी और स्टॉक एक्सचेंज जैसी संस्थाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही. यह पहल भारत के कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में एटॉमिक डिलीवरी-वर्सस-पेमेंट (DvP) सेटलमेंट और साझा लेजर आधारित पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है.
आरईसी के निदेशक (वित्त) राजेश कुमार ने कहा कि प्रगतिशील विनियमन, हितधारकों के साथ निरंतर संवाद और तकनीक आधारित सुधारों के जरिए SEBI भारतीय पूंजी बाजार को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि कारोबार करने में सुगमता, बाजार दक्षता और नियामकीय प्रक्रियाओं में तेजी पर SEBI के निरंतर जोर से भारतीय वित्तीय बाजारों की गहराई और मजबूती बढ़ी है.
टोकनाइजेशन की यह पहल Demat 2.0 की अवधारणा से भी जुड़ी है. इसके तहत प्रतिभूतियों के स्वामित्व को एक अनुमति-आधारित (Permissioned) डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर पर सुरक्षित रूप से दर्ज और ट्रैक किया जाता है. इससे सेटलमेंट से जुड़े जोखिम और परिचालन संबंधी जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है. राजेश कुमार के मुताबिक, कॉरपोरेट बॉन्ड का टोकनाइजेशन और Demat 2.0 भारत के ऋण बाजार के विकास में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी और CBDC-सक्षम सेटलमेंट का इस्तेमाल करते हुए यह पहल भविष्य के पूंजी बाजार के लिए नई डिजिटल बुनियाद तैयार करने की दिशा में कदम है.