ब्यूरो रिपोर्ट (जयपुर, राजस्थान)
मैं जयपुर हूं। मुझे बसाए हुए करीब तीन सौ साल होने को हैं। 1727 में जब मुझे बसाया गया था, तब मेरे चारों ओर की दुनिया कुछ और थी। रास्ते अलग थे, यात्राएं लंबी थीं और शहरों को देखने का मतलब भी अलग था। मैंने अपने बनने के साथ बाजार देखे, महल देखे, चौक देखे, कारीगर देखे और दूर-दूर से आने वाले लोगों की आवाजाही देखी। इन वर्षों में बहुत कुछ बदला। वैभव बदला, समय बदला, साधन बदले, लोग बदले और मुझे देखने वाली दुनिया भी बदलती गई। लेकिन आज मैं इतिहास की बात नहीं करूंगा। आज मैं सिर्फ पर्यटन की बात करूंगा।
मेरे लिए पर्यटन कोई नया शब्द नहीं है। बहुत पहले से लोग मेरे पास आते रहे हैं। कोई मेरे महलों को देखने, कोई बाजारों को जानने, कोई मेरे रंगों को महसूस करने और कोई यहां की कारीगरी देखने आता रहा। समय के साथ इन यात्राओं का मतलब बदलता गया और मैं भी ऐसा शहर बनता गया, जहां आने वाला सिर्फ कुछ इमारतें देखकर लौटना नहीं चाहता, बल्कि मेरे जीवन का थोड़ा हिस्सा अपने साथ ले जाना चाहता है। मेरी पहचान की शुरुआत मेरे स्थापत्य से होती है। हवा महल की खिड़कियों से गुजरती हवा हो, सिटी पैलेस की राजसी छटा हो या आमेर की पहाड़ियों पर खड़ा किला ये मेरे लिए सिर्फ पुरानी इमारतें नहीं हैं। दुनिया के लिए ये मेरे परिचय-पत्र बन गए हैं।
मेरे बाजार मेरी पर्यटन कहानी का हिस्सा बने। आभूषणों की चमक, कपड़ों के रंग, हस्तशिल्प की बारीकी, ब्लू-पॉटरी, लाख की चूड़ियां और हाथों से आकार लेते अनगिनत शिल्प। मेरे बाजारों ने पर्यटकों को बताया कि मुझे सिर्फ देखा नहीं जा सकता, मुझे खरीदा, पहना और घर ले जाया जा सकता है।
और… फिर मेरी कहानी में स्वाद जुड़ा। दाल-बाटी-चूरमा से लेकर कचौरी और मिठाइयों तक, मेरे भोजन ने भी यात्रियों से अपना परिचय बनाया। पर्यटन धीरे-धीरे स्मारकों से निकलकर अनुभव बनता गया। …और अब मेरे पुराने महलों ने नया जीवन पाया। हेरिटेज होटल बने। राजसी हवेलियों और महलों में ठहरना पर्यटन का हिस्सा बना। दुनिया के कई हिस्सों से लोग मेरे पास सिर्फ घूमने नहीं, शादी करने, उत्सव मनाने और जीवन के खास पलों को यादगार बनाने आने लगे। डेस्टिनेशन वेडिंग ने मेरी पर्यटन पहचान को नया रंग दिया। मैंने यह बदलाव भी देखा कि जो पर्यटक कभी मेरे लिए एक दिन निकालता था, वह अब मेरे साथ कई अनुभव जोड़ना चाहता है विरासत के साथ भोजन, खरीदारी के साथ कला, महल के साथ संगीत और यात्रा के साथ स्थानीय जीवन। यानी मैं सिर्फ एक जगह नहीं रहा।मैं एक अनुभव बन गया।
…और फिर 2026 आया
इस बार मेरे पास आने वाले मेहमान सिर्फ मुझे देखने नहीं आए थे। वे दुनिया के उन देशों से आए थे, जो पर्यटन के भविष्य पर बात करने जयपुर पहुंचे थे। ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक ने मुझे एक अलग भूमिका दी। मैं इस बार केवल पर्यटन स्थल नहीं था, बल्कि वैश्विक पर्यटन संवाद का मंच भी था। यहां पर्यटन के भविष्य पर बात हुई एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) और पर्यटन, सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन, पर्यटन कौशल और क्षमता निर्माण तथा देशों के बीच पर्यटन आदान-प्रदान और आसान यात्रा सुविधा पर। इन चर्चाओं के बीच जयपुर घोषणा पत्र सामने आया। इस पूरे संवाद के पीछे भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की एक बड़ी सोच भी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की इस अध्यक्षता को जन-केंद्रित विकास और सतत भविष्य की दिशा से जोड़ा है। सतत जीवनशैली, वनीकरण, सर्कुलर इकोनॉमी और समुदाय आधारित विकास पर जोर इसी सोच का हिस्सा है। मुझे यह बात अपने बहुत करीब लगी। क्योंकि पर्यटन भी आखिर लोगों से ही बनता है उन जगहों से, जहां लोग रहते हैं उन कारीगरों से, जिनके हाथों में शहर की पहचान होती है, उन परंपराओं से, जिन्हें पीढ़ियां आगे बढ़ाती हैं और उन अनुभवों से, जिन्हें लेकर पर्यटक अपने घर लौटते हैं। मुझे अच्छा लगा।
…क्योंकि इस बार दुनिया मेरे बारे में सिर्फ यह बात करने नहीं आई थी कि मैं कितना सुंदर हूं। दुनिया यह बात करने आई थी कि आने वाले समय में पर्यटन कैसा होगा। और मैंने उन्हें अपना एक और चेहरा दिखाया मेरी विरासत। ब्रिक्स के प्रतिनिधि हवा महल, सिटी पैलेस और आमेर पैलेस पहुंचे। उन्होंने उन जगहों को देखा, जिनके साथ मेरी पहचान सदियों से जुड़ी है। मेरे लिए यह केवल स्मारकों का भ्रमण नहीं था। यह उन लोगों के लिए मेरे शहर को करीब से देखने का मौका था, जो दुनिया के पर्यटन की दिशा तय करने वाली बातचीत का हिस्सा थे। इसी दौरान मेरे रामबाग पैलेस में राजस्थान और यूएई के बीच पर्यटन और निवेश पर बातचीत हुई।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यूएई की कंपनियों को राजस्थान में ऊर्जा, हॉस्पिटिलिटी और दूसरे क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। किले, महल, हवेलियां, रेगिस्तान, अभयारण्य, जेम्स एंड ज्वेलरी, हैंडिक्राफ्ट और टेक्सटाइल, मेरे राज्य की यही विविधता निवेश की बातचीत का आधार बनी।
यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक-अल-मरी ने राजस्थान के हॉस्पिटिलिटी क्षेत्र में रुचि जताई और जयपुर-दुबई हवाई संपर्क को और बेहतर करने की इच्छा भी व्यक्त की। मुझे लगा, पर्यटन की मेरी कहानी अब एक और मोड़ पर पहुंच गई है।
खूबसूरत शाम
एक रामबाग पैलेस में जब ‘मेघारंग द कलर्स ऑफ सावन’ की सांस्कृतिक प्रस्तुति शुरू हुई तो मेरे सामने भारत के रंगों का पूरा संसार उतर आया। करीब 100 कलाकारों ने कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी और मणिपुरी के साथ कठपुतली, घूमर, भवई, कालबेलिया, चरी, गैर, छऊ, ढोल और चोलोम की प्रस्तुतियां दीं। उस शाम मेरे लिए राजस्थान केवल एक प्रदेश नहीं था। वह एक धुन था। एक रंग था। एक नृत्य था। एक कहानी थी।
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने ब्रिक्स प्रतिनिधियों का स्वागत किया और उनसे राजस्थान में कुछ और समय रुकने या परिवार के साथ दोबारा आने का आग्रह किया। मैंने उनकी बात सुनी। और शायद वह बात मेरी भी थी।
क्योंकि मैं जयपुर हूं। मैंने 1727 से अब तक बहुत कुछ देखा है। मैंने तीन सदियों में एक बात जरूर सीखी है, शहर सिर्फ इमारतों से नहीं बनते। उन्हें देखने आने वाले लोग भी उनकी कहानी लिखते हैं। इसलिए अगली बार जब आप जयपुर आएं, तो मुझे सिर्फ देखने मत आइएगा। मेरी गलियों में थोड़ा ठहरिएगा। मेरे रंगों को थोड़ा महसूस कीजिएगा। मेरी आवाज सुनिएगा। क्योंकि मैं जयपुर हूं और पर्यटन मेरे लिए सिर्फ यात्रा नहीं, मेरी अपनी कहानी है।