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    2030 तक पर्यटन महाशक्ति बनने की राह पर राजस्थान, तैयार हुआ ब्लूप्रिंट
    टूरिज्म

    2030 तक पर्यटन महाशक्ति बनने की राह पर राजस्थान, तैयार हुआ ब्लूप्रिंट

    Shivani SrviastavaBy Shivani SrviastavaJune 23, 2026No Comments4 Mins Read
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    जयपुर। राजस्थान अपनी पारंपरिक पर्यटन छवि से आगे बढ़ते हुए अब एक आधुनिक, अनुभव-केंद्रित और वैश्विक पर्यटन मॉडल की दिशा में तेजी से अग्रसर है। वर्ष 2030 को लक्ष्य बनाकर राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र में ऐसी रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें विरासत संरक्षण के साथ आधुनिक पर्यटन अवसंरचना, ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन, धार्मिक स्थलों का समग्र विकास, नए पर्यटन सर्किट, एस्ट्रो टूरिज्म और डिजिटल तकनीक को समान महत्व दिया जा रहा है। उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यटन को स्थानीय रोजगार, सांस्कृतिक संरक्षण और क्षेत्रीय आर्थिक विकास का सशक्त माध्यम बनाना है।

    उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी के नेतृत्व में पर्यटन विभाग ने राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों को नई दृष्टि से विकसित करने की व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। विभाग का प्रयास है कि राजस्थान का प्रत्येक क्षेत्र अपनी विशिष्ट पहचान के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर उभरे तथा पर्यटकों को पारंपरिक दर्शनीय स्थलों के साथ नए अनुभव भी प्राप्त हों।

    उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी

    पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक दलीप सिंह राठौड़ ने बताया कि राज्य सरकार विरासत संरक्षण को पर्यटन विकास की आधारशिला मानते हुए कार्य कर रही है। शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन से लेकर अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के संवर्धन तक अनेक योजनाओं पर काम चल रहा है। उनका कहना है कि जब विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास साथ-साथ आगे बढ़ते हैं, तब स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलती है और रोजगार के अवसरों का विस्तार होता है।

    राजस्थान की पर्यटन पहचान को और व्यापक बनाने के लिए नए पर्यटन सर्किट विकसित किए जा रहे हैं। महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट सहित कई परियोजनाओं के माध्यम से ऐसे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन से जोड़ा जा रहा है, जो अब तक मुख्यधारा से अपेक्षाकृत दूर रहे हैं। इससे पर्यटकों को राजस्थान को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर मिलेगा और पर्यटन का लाभ अधिक जिलों तक पहुंचेगा।

    ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन को भी विभाग की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया गया है। गांवों की लोक संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन और लोककलाओं को पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों को नई आर्थिक संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ेगी और पर्यटन से होने वाली आय का लाभ गांवों तक पहुंचेगा।

    धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। नाथद्वारा, खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी, करणी माता सहित प्रमुख आस्था स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं, यात्री सेवाओं और पर्यटन प्रबंधन को सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके।

    पर्यटन विभाग ने पश्चिमी राजस्थान में एस्ट्रो टूरिज्म की संभावनाओं को भी नई दिशा दी है। मरुस्थलीय क्षेत्रों का स्वच्छ आकाश और न्यूनतम प्रकाश प्रदूषण इन्हें तारों और खगोलीय घटनाओं के अवलोकन के लिए उपयुक्त बनाता है। विभाग इस क्षेत्र को पर्यटन के नए आकर्षण के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य कर रहा है।

    वैश्विक पर्यटन बाजार में राजस्थान की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विभाग विभिन्न देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेलों, रोड शो और बिजनेस-टू-बिजनेस कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर रहा है। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से राज्य की पर्यटन संभावनाओं का वैश्विक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

    संयुक्त निदेशक दलीप सिंह राठौड़ के अनुसार आने वाले वर्षों में पर्यटन विभाग का लक्ष्य ऐसा पर्यटन मॉडल विकसित करना है, जिसमें विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक संवर्धन, आधुनिक अवसंरचना, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और वैश्विक ब्रांडिंग एक साथ आगे बढ़ें। उनका कहना है कि इसी समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से राजस्थान वर्ष 2030 तक देश के सबसे समृद्ध, विविध और अनुभव-केंद्रित पर्यटन राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

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    Shivani Srviastava

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